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Home Business बाजार में आ गया ‘राजनाथ आम’, नहीं जानते भारत के लोग किसने रखा नाम

बाजार में आ गया ‘राजनाथ आम’, नहीं जानते भारत के लोग किसने रखा नाम

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बाजार में आ गया ‘राजनाथ आम’, नहीं जानते भारत के लोग किसने रखा नाम
Rajnath Mango

Rajnath Mango: आम के शौकीनों जान लीजिए कि बाजार में ‘राजनाथ आम’ भी आ गया है. भारत के अधिकतर लोग फिलहाल इस आम के बारे में नहीं जानते हैं. खास यह है कि लोग यह भी नहीं जानते कि इस आम का नाम कौन रखा है. दूसरी खास बात यह है कि यह आम वहीं बिकता है, जहां से केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह का ताल्लुक है. अगर इसके बारे में जान जाएंगे, तो उनके मुंह से अचानक ‘भक्क’ निकल जाएगा. आइए, इस ‘राजनाथ आम’ के बारे में जानते हैं.

किसने रखा राजनाथ आम का नाम

दुनिया भर में ‘मैंगो मैन’ के नाम से मशहूर पद्मश्री सम्मानित बागवानी विशेषज्ञ कलीमुल्लाह खान ने आम की एक नई किस्म विकसित की है और उसका नाम देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के नाम पर रखा है. इस नव विकसित आम को अब “राजनाथ आम” कहा जा रहा है.

‘ग्राफ्टिंग’ तकनीक से तैयार हुआ खास आम

कलीमुल्लाह खान ने मलीहाबाद स्थित अपने आम के बाग में ‘ग्राफ्टिंग’ (कलम विधि) तकनीक से इस किस्म को तैयार किया है. ग्राफ्टिंग वह विधि है, जिसमें दो भिन्न पौधों के हिस्सों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है, जिससे एक अनूठी किस्म विकसित होती है.

देश सेवा करने वालों के नाम पर आम

कलीमुल्लाह खान पहले भी कई चर्चित हस्तियों जैसे नरेंद्र मोदी, अमित शाह, सोनिया गांधी, सचिन तेंदुलकर, ऐश्वर्या राय और अखिलेश यादव के नाम पर आम की किस्में विकसित कर चुके हैं. उनका मानना है, “मैं अपने आमों का नाम उन लोगों पर रखता हूं, जिन्होंने सच्चे अर्थों में देश की सेवा की है. यह पीढ़ियों तक उन्हें याद रखने का तरीका है.”

राजनाथ सिंह से कलीमुल्लाह प्रभावित

मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि वे रक्षामंत्री की सोच और संतुलित दृष्टिकोण से प्रभावित हैं. उन्होंने कहा, “हाल ही में पाकिस्तान पर चर्चा के दौरान मैंने महसूस किया कि राजनाथ सिंह युद्ध नहीं, बल्कि शांति चाहते हैं. यह सोच बेहद मूल्यवान है.” खान का मानना है कि जंग नहीं, संवाद ही समाधान है और यही संदेश वे अपने आमों के माध्यम से देना चाहते हैं.

मलीहाबाद जहां पैदा हुए हजारों किस्म के आम

कलीमुल्लाह खान ने मलीहाबाद के ऐतिहासिक महत्व की ओर इशारा करते हुए बताया कि 1919 के दौर में यहां 1300 से अधिक किस्मों के आम मौजूद थे. लेकिन समय के साथ कई किस्में खत्म हो गईं. उन्होंने कहा, “मैं इन लुप्त हो चुकी किस्मों को संरक्षित और पुनर्जीवित करने में लगा हूं. अब तक मैंने 300 से अधिक किस्में तैयार की हैं.”

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स्वाद ही नहीं, औषधीय गुणों से भरपूर है आम

कलीमुल्लाह खान के अनुसार, आम सिर्फ एक स्वादिष्ट फल नहीं, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर है. वे अपने आमों के औषधीय लाभों पर शोध प्रस्तुत कर चुके हैं और चाहते हैं कि देश के शोध संस्थान इसे और आगे ले जाएं. ‘राजनाथ आम’ अमन और विरासत का एक संदेश है. कलीमुल्लाह खान का मानना है कि अगर आम जैसी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सहेजना है, तो उसे सिर्फ स्वाद या व्यापार तक सीमित नहीं किया जा सकता. “राजनाथ आम” उनके विचार, सम्मान और अमन की सोच का प्रतीक है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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