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PPF vs Fixed Deposit: 35 साल के पिता को किसमें लगाना चाहिए पैसा, पीपीएफ या फिक्स्ड डिपॉजिट

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PPF vs Fixed Deposit: 35 साल के पिता को किसमें लगाना चाहिए पैसा, पीपीएफ या फिक्स्ड डिपॉजिट
पीपीएफ और फिक्स्ड डिपॉजिट में कौन बेहतर.

PPF vs Fixed Deposit: क्या आपकी उम्र 35 साल है? आप सैलरी वाली नौकरी करते हैं और आपके एक या दो बच्चे हैं? तब तो आपकी जिंदगी ईएमआई, स्कूल फीस और घरेलू खर्चों के बीच घूम रही होगी. ऐसे में अब ठीक से बचत शुरू करनी चाहिए वाली बात आपके घर में भी होती होगी? इस बातचीत का निष्कर्ष क्या निकलता है? आप घरेलू खर्च से बचत करके पैसा कहां लगाना चाहते हैं, ताकि उससे बेहतर रिटर्न के साथ-साथ वह पैसा भविष्य के लिए काम आ सके? आम तौर पर इस स्टेज पर भारत ज्यादातर परिवार निवेश के दो सुरक्षित विकल्प पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की ओर देखते हैं. ये दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन इनका रोल, टैक्स ट्रीटमेंट और लॉन्ग-टर्म असर काफी अलग है. तब फिर आपको किसमें निवेश करना चाहिए? क्या आपके लिए पीपीएफ बेहतर होगा या फिर फिक्स्ड डिपॉजिट से आपको अच्छी आमदनी हो जाएगी? आइए, इससे विस्तार से समझते हैं.

पीपीएफ और फिक्स्ड डिपॉजिट की दरें

फिलहाल, पीपीएफ पर सालाना 7.1% ब्याज मिलता है, जिसे सरकार तय करती है और हर तिमाही रिव्यू किया जाता है. यह दर कई तिमाहियों से स्थिर है. वहीं, बड़े बैंक 1 से 3 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट पर करीब 6.25% से 6.45% तक ब्याज दे रहे हैं, जबकि कुछ छोटे या विशेष संस्थान चुनिंदा अवधि के लिए 7.3% तक ऑफर कर रहे हैं. कागज पर देखें तो फिक्स्ड डिपॉजिट की रेट आकर्षक लग सकती है, लेकिन असली खेल टैक्स के बाद शुरू होता है.

टैक्स का फर्क, जो बदल देता है रिटर्न

पीपीएफ का सबसे बड़ा फायदा इसका ईईई स्टेटस है. निवेश पर टैक्स छूट, ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री और मैच्योरिटी पर भी टैक्स नहीं लगता है. वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट का ब्याज आपकी इनकम में जुड़ता है और पूरी तरह टैक्सेबल होता है. अगर आप 20% या 30% टैक्स स्लैब में हैं, तो टैक्स काटने के बाद फिक्स्ड डिपॉजिट का रियल रिटर्न अक्सर पीपीएफ से कम रह जाता है. 10 से 15 साल में यही फर्क आपकी सेविंग को कई लाख रुपये आगे-पीछे कर सकता है.

लॉन्ग टर्म निवेश का किंग है पीपीएफ

35 साल की उम्र आपके जीवन लिए काफी लंबा समय है. पीपीएफ को खास तौर पर इसी टाइमफ्रेम के लिए बनाया गया है. इसमें 15 साल का लॉक-इन होता है, जिसे आगे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है. नियमित निवेश के साथ यह बच्चों की हायर एजुकेशन या आपकी रिटायरमेंट के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद फंड बन सकता है, क्योंकि यह सरकार समर्थित है और ब्याज टैक्स-फ्री है. इसलिए आपको बार-बार फिक्स्ड डिपॉजिट रिन्यू करने या बदलती दरों की चिंता नहीं करनी पड़ती है.

पीपीएफ को हमेशा रखें अछूता

एक आम युवा परिवार के लिए पीपीएफ सबसे अच्छा तब काम करता है, जब इसे रोजमर्रा के खर्चों से दूर रखा जाता है. सैलरी के दिन एक फिक्स्ड मंथली ट्रांसफर सेट करना, साल के आखिर में बड़ी रकम जोड़ने से ज्यादा आसान होता है. लंबी अवधि में बिना टैक्स और लगातार कंपाउंडिंग की वजह से आपका निवेश कई गुना बढ़ सकता है.

लिक्विडिटी है फिक्स्ड डिपॉजिट की ताकत

पीपीएफ से लॉन्ग टर्म में बेहतर पैसा मिलता है, तब इसका मतलब यह नहीं है कि फिक्स्ड डिपॉजिट बेकार है. फिक्स्ड डिपॉजिट का सबसे बड़ा फायदा इसकी लिक्विडिटी है. आप कुछ महीनों से लेकर कुछ सालों तक के लिए पैसे लॉक कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर डिपॉजिट तोड़ भी सकते हैं. हां, फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ने पर आपको थोड़ी पेनल्टी देनी होगी. घर के रेनोवेशन, कार खरीदने या जॉब बदलने जैसे 2 से 5 साल के लक्ष्यों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट ज्यादा प्रैक्टिकल होती है.

बच्चों वाले परिवारों में फिक्स्ड डिपॉजिट का इस्तेमाल

कई माता-पिता बोनस या अचानक मिले पैसों को फिक्स्ड डिपॉजिट कर देते हैं, जिन्हें अगले दो-तीन साल में खर्च करना होता है. यहां सबसे ऊंची ब्याज दर के पीछे भागना जरूरी नहीं होता. अक्सर लोग बड़े और भरोसेमंद बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट रखना पसंद करते हैं, भले ही रिटर्न थोड़ा कम मिले.

पीपीएफ बनाम फिक्स्ड डिपॉजिट

35 साल के बच्चों वाले व्यक्ति की नजर से देखें, तो पीपीएफ और फिक्स्ड डिपॉजिट एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि अलग-अलग जरूरतों के समाधान हैं. पीपीएफ लंबे समय के लक्ष्यों और टैक्स-फ्री ग्रोथ के लिए बेहतर है. फिक्स्ड डिपॉजिट उन पैसों के लिए सही है जिनकी आपको निकट भविष्य में जरूरत पड़ सकती है.

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कहां रखें पैसा

आसान शब्दों में, जो पैसा आप तब तक नहीं छूना चाहते जब तक बच्चे कॉलेज में न हों या आप 50 के करीब न पहुंच जाएं, उसे पीपीएफ में डालें. जिन पैसों की जरूरत अगले कुछ सालों में पड़ सकती है, उन्हें अलग-अलग मैच्योरिटी वाली फिक्स्ड डिपॉजिट में रखें. ज्यादातर युवा परिवारों के लिए यही बैलेंस सुरक्षा, लिक्विडिटी और ग्रोथ का सबसे आरामदायक रास्ता साबित होता है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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