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Home Business रसोई का बजट फिर बिगड़ेगा? इंटरनेशनल मार्केट में पाम ऑयल की कीमतों में भारी उछाल, जानें भारत पर असर

रसोई का बजट फिर बिगड़ेगा? इंटरनेशनल मार्केट में पाम ऑयल की कीमतों में भारी उछाल, जानें भारत पर असर

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रसोई का बजट फिर बिगड़ेगा? इंटरनेशनल मार्केट में पाम ऑयल की कीमतों में भारी उछाल, जानें भारत पर असर

Palm Oil Prices : खाने के तेल (एडिबल ऑयल) के बाजार से आम जनता के लिए एक बड़ी खबर आ रही है. अगर आप सोच रहे थे कि आने वाले दिनों में तेल की कीमतें कम होंगी, तो फिलहाल इसकी उम्मीद बेहद कम है. ग्लोबल मार्केट में मची हलचल के कारण पाम ऑयल (Palm Oil) के दाम एक बार फिर तेजी से ऊपर भाग रहे हैं और यह पिछले दो हफ्तों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं.

मलेशिया के बाजार में पाम ऑयल की कीमतें 4,600 रिंग्गित (मलेशियाई करेंसी) प्रति टन के आंकड़े को पार कर चुकी हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया भर में बायोफ्यूल (Biofuel) यानी जैविक ईंधन बनाने के लिए वेजिटेबल ऑयल की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है, जिसकी वजह से जून के महीने में भी तेल की कीमतों में नरमी आने के आसार नहीं हैं.

जून में भी राहत की उम्मीद नहीं, कीमतें रहेंगी गरम

दुनिया भर में खाने के तेल की सप्लाई का सबसे बड़ा हिस्सा मलेशिया और इंडोनेशिया से आता है. अप्रैल के महीने में तो पाम ऑयल की कीमतें रिकॉर्ड 4,800 रिंग्गित प्रति टन के पार चली गई थीं. हालांकि, बीच में कीमतें थोड़ी कम जरूर हुईं, लेकिन बाजार में दोबारा आई जोरदार खरीदारी और सोयाबीन तेल के महंगे होने से पाम ऑयल को फिर से बूस्ट मिल गया है.

‘मलेशियन पाम ऑयल बोर्ड’ (MPOB) के मुताबिक, जून के महीने में कच्चा पाम ऑयल औसतन 4,400 रिंग्गित प्रति टन के आसपास बना रह सकता है. मार्च से अक्टूबर का समय पाम ऑयल के उत्पादन के लिए सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि सूखा मौसम होने से खेतों में काम आसान होता है और तेल भी ज्यादा निकलता है. इसी वजह से अप्रैल में मलेशिया का पाम ऑयल स्टॉक थोड़ा बढ़कर 2.31 मिलियन टन हो गया है, जो सप्लाई को बनाए रखने में मदद करेगा.

सोयाबीन तेल भी हुआ महंगा

पाम ऑयल की कीमतों में इस आग के पीछे अमेरिका और यूरोप की बायोफ्यूल नीतियां हैं. अमेरिका में बायोफ्यूल सेक्टर में सोयाबीन तेल की मांग इतनी बढ़ गई है कि यूरोप में इसकी कीमतें नवंबर 2022 के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं. आज के समय में सोयाबीन तेल दुनिया का सबसे महंगा मुख्य वेजिटेबल ऑयल बन चुका है. अब चूंकि सोयाबीन तेल बहुत महंगा हो गया है, इसलिए इंटरनेशनल मार्केट में लोग इसके विकल्प के तौर पर पाम ऑयल को ज्यादा खरीद रहे हैं, जिससे पाम ऑयल की मांग और कीमत दोनों बढ़ गई हैं.

भारतीय उपभोक्ताओं के लिए क्या है इसके मायने?

भारतीयों के लिए अच्छी खबर यह है कि इस पूरी उठापटक के बीच भी पाम ऑयल अभी भी सबसे किफायती और सस्ता विकल्प बना हुआ है. भारत में इस्तेमाल होने वाले अन्य तेलों के मुकाबले पाम ऑयल की कीमतें अब भी कंट्रोल में हैं. अर्जेंटीना के सोयाबीन तेल की तुलना में मलेशिया का पाम ऑयल सस्ता मिल रहा है, इसलिए भारतीय आयातक (इंपोर्टर्स) इसे ही पहली पसंद बना रहे हैं. साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में मलेशिया का पाम ऑयल एक्सपोर्ट 25.5% बढ़कर 5.38 मिलियन टन पर पहुंच गया है, जो 2019 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है.

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अभिषेक पाण्डेय पिछले 4 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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