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Home Business नितिन गडकरी बोले – ”इस्पात और सीमेंट उद्योग में साठगांठ देश के विकास के लिए बड़ी समस्या”

नितिन गडकरी बोले – ”इस्पात और सीमेंट उद्योग में साठगांठ देश के विकास के लिए बड़ी समस्या”

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नितिन गडकरी बोले – ”इस्पात और सीमेंट उद्योग में साठगांठ देश के विकास के लिए बड़ी समस्या”
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

Nitin Gadkari: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को आईसीईआरपी 2025 (ICERP 2025) सम्मेलन को संबोधित करते हुए इस्पात और सीमेंट उद्योगों के बीच साठगांठ को लेकर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि यह साठगांठ देश के बुनियादी ढांचे के विकास में बाधा बन रही है. उन्होंने कहा, “इस्पात और सीमेंट उद्योग कुछ लोगों के हाथों में हैं. ये हमेशा अपनी दरें तय करते हैं और उनके बीच की साठगांठ देश के विकास के लिए एक बड़ी समस्या है.”

साठगांठ को तोड़ने का विकल्प

गडकरी ने सुझाव दिया कि फाइबर-प्रबलित प्लास्टिक (FRP) इस समस्या का समाधान हो सकता है. उन्होंने FRP कंपनियों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया और कहा कि वैकल्पिक सामग्री के विकास में उनकी गहरी रुचि है. उन्होंने FRP उद्योग से आग्रह किया कि वे अपनी कीमतें कम करें ताकि इनका उपयोग इस्पात और सीमेंट की तुलना में अधिक प्रभावी हो सके. गडकरी ने कहा, “यदि FRP की कीमत इस्पात से 20-25% कम हो सकती है, तो यह देश के लिए बड़ा लाभ साबित होगा.”

FRP का उपयोग और लाभ

गडकरी ने FRP के उपयोग को बुनियादी ढांचे, विमानन, शिपिंग, सड़क निर्माण और मेट्रो रेल जैसे क्षेत्रों में लागू करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि FRP का उपयोग न केवल लागत को कम करेगा, बल्कि बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में नई क्रांति ला सकता है.

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गडकरी की अपील

मंत्री ने कहा कि FRP उद्योग को अपनी लागत को कम करने और सरकार के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है ताकि यह इस्पात और सीमेंट उद्योग पर निर्भरता को खत्म करने में सहायक हो सके. उन्होंने उद्योग से कहा कि यदि वे FRP की दर को 20-25% तक कम कर सकते हैं, तो यह देश के लिए फायदेमंद होगा.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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