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Home Business जोमैटो-स्विगी वर्कर्स को मिलेगी सोशल सिक्योरिटी, जानें नए लेबर कोड के फायदे 

जोमैटो-स्विगी वर्कर्स को मिलेगी सोशल सिक्योरिटी, जानें नए लेबर कोड के फायदे 

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जोमैटो-स्विगी वर्कर्स को मिलेगी सोशल सिक्योरिटी, जानें नए लेबर कोड के फायदे 
Impact of New Labour Codes (Photo: Freepik)

Impact of New Labour Codes: भारत सरकार ने 29 पुराने लेबर कानूनों को मिलाकर 4 नए लेबर कोड तैयार किए हैं, जो अब लागू होने की कगार पर हैं. केंद्र सरकार ने इनके अंतिम नियम नोटिफाई कर दिए हैं. अब राज्यों की बारी है कि वे अपने नियम तय करें. यह बदलाव बैंकिंग, टेलीकॉम, माइनिंग और इंश्योरेंस जैसे सेक्टरों पर तुरंत असर डालेगा. आइए समझते हैं कि इन नए नियमों से आपकी जिंदगी और काम करने के तरीके में क्या-क्या बदलने वाला है.

आपकी सैलरी और टेक-होम पे में क्या बदलाव आएगा?

नए नियमों में मजदूरी (Wage) की परिभाषा बदल दी गई है. अब आपकी बेसिक सैलरी कुल सैलरी का कम से कम 50% होनी चाहिए. इसका सीधा असर आपके पीएफ और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा. जब बेसिक सैलरी बढ़ेगी, तो पीएफ और ग्रेच्युटी में कटने वाला पैसा भी बढ़ जाएगा. इससे आपकी रिटायरमेंट की सेविंग्स तो मजबूत होगी, लेकिन हाथ में आने वाली सैलरी (Take-home pay) थोड़ी कम हो सकती है. साथ ही, कंपनियों पर भी सैलरी का बोझ बढ़ने की उम्मीद है.

काम के घंटे और छुट्टियों का क्या गणित है?

नए फ्रेमवर्क के तहत हफ्ते में अधिकतम 48 घंटे काम करने की सीमा तय की गई है. अगर कोई कंपनी 12 घंटे की शिफ्ट रखती है, तो उसे कर्मचारी को हफ्ते में 3 दिन की छुट्टी देनी होगी. इसके अलावा, ओवरटाइम, सैलरी स्लिप का फॉर्मेट, हाजिरी रजिस्टर और बोनस के नियमों को भी आसान और पारदर्शी बनाया गया है. अब कॉन्ट्रैक्ट लेबर को बोनस देना प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की जिम्मेदारी होगी.

गिग वर्कर्स और डिजिटल सिस्टम से क्या फायदा होगा?

पहली बार जोमैटो, स्विगी या ओला-उबर जैसे प्लेटफॉर्म्स से जुड़े गिग वर्कर्स को भी सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाया गया है. इनके लिए अलग से योजनाएं बनाई जाएंगी. पूरी व्यवस्था को डिजिटल करने की तैयारी है, जिसमें सिंगल रजिस्ट्रेशन और सिंगल लाइसेंस जैसी सुविधाएं होंगी. अब इंस्पेक्टर सिर्फ गलती निकालने नहीं आएगा, बल्कि वह फैसिलिटेटर के रूप में काम करेगा और वेब-आधारित जांच की जाएगी.

विवादों और शिकायतों का निपटारा कैसे होगा?

इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड के जरिए कंपनियों में झगड़ों को सुलझाने के लिए ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम को मजबूत किया गया है. ले-ऑफ, हड़ताल और तालाबंदी जैसे मामलों के लिए अब ज्यादा स्पष्ट नियम होंगे. मॉडल स्टैंडिंग ऑर्डर्स के जरिए कर्मचारियों का वर्गीकरण, छुट्टियों के नियम और अनुशासन से जुड़ी कार्यवाही में एकरूपता लाई जाएगी ताकि किसी भी राज्य में काम करते समय नियमों को लेकर भ्रम न रहे.

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