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Home Business पैसा है, पर इन्वेस्टमेंट क्यों नहीं? म्यूचुअल फंड में बिहार का हिस्सा मात्र 1%

पैसा है, पर इन्वेस्टमेंट क्यों नहीं? म्यूचुअल फंड में बिहार का हिस्सा मात्र 1%

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पैसा है, पर इन्वेस्टमेंट क्यों नहीं? म्यूचुअल फंड में बिहार का हिस्सा मात्र 1%
Mutual Fund Investment

Mutual Fund Investment: देश की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री सितंबर 2025 तक रिकॉर्ड 75.36 लाख करोड़ रुपये के एयूएम (AUM) के साथ नई ऊंचाइयां छू रही है. छोटे शहरों में निवेश तेजी से बढ़ रहा है लेकिन एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इंडिया (AMFI) की ताजा रिपोर्ट ने बिहार के लिए चिंताजनक तस्वीर पेश की है. देश के सबसे बड़े निवेशक राज्य महाराष्ट्र (40.5% हिस्सेदारी) के मुकाबले बिहार की हिस्सेदारी मात्र 1% है, जो उसे देश में 16वें स्थान पर धकेलता है.

बिहार का झारखंड से भी कम इंवेस्टमेंट

झारखंड (1.1% हिस्सेदारी) भी बिहार से आगे है, जिसकी राजधानी रांची 24वें और जमशेदपुर 26वें स्थान पर है. वहीं राजधानी पटना (17वां स्थान) और मुजफ्फरपुर (90वां स्थान). वित्तीय योजनाकारों का मानना है कि बिहार की यह स्थिति क्षमता की कमी नहीं, बल्कि वित्तीय ज्ञान की कमी के कारण है. फाइनेंशियल गोल प्लानर राजीव लोचन पंकज ने बताया कि जहां दिल्ली और महाराष्ट्र में प्रति निवेशक औसत निवेश 2.5 लाख रुपए से अधिक है वहीं बिहार में यह रकम मात्र 6,140 रुपए है.

GDP में म्यूचुअल फंड निवेश का अनुपात भी बिहार (13% से कम) में, महाराष्ट्र (78%) और यहां तक कि उत्तर प्रदेश (14.4%) से भी काफी कम है. यह स्पष्ट करता है कि प्रदेश के लोगों को अभी भी सुरक्षित और बेहतर रिटर्न देने वाले निवेश विकल्पों की जानकारी नहीं है.

युवा आबादी ही खोलेगी फंड का ताला

एम्फी रजिस्टर्ड SIRF डिस्ट्रिब्युटर श्वेता सिन्हा ने बिहार की विशाल युवा आबादी और बढ़ती आय को इस इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा अवसर बताया. उनका मानना है कि यदि प्रदेश के युवा वित्तीय तौर पर जागरूक होते हैं और म्यूचुअल फंड जैसे सरल विकल्पों में निवेश शुरू करते हैं, तो बिहार राष्ट्रीय वित्तीय चार्ट पर अपनी हिस्सेदारी को तेजी से बढ़ा सकता है.

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