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Home Business मुंबई बना भारत का सबसे बड़ा भुलक्कड़ शहर, कैब में सामान भूलने में दिल्ली को पीछे छोड़ा

मुंबई बना भारत का सबसे बड़ा भुलक्कड़ शहर, कैब में सामान भूलने में दिल्ली को पीछे छोड़ा

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मुंबई बना भारत का सबसे बड़ा भुलक्कड़ शहर, कैब में सामान भूलने में दिल्ली को पीछे छोड़ा
Uber Report

Uber: कैब में सामान छोड़ने के मामले में देश की औद्योगिक राजधानी मुंबई सबसे बड़े भुलक्कड़ शहरों में से एक है. इसने कैब में सामान छोड़ने के मामले में दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया है. उबर की ताजा Lost and Found Index रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई भारत का सबसे भुलक्कड़ शहर बनकर उभरा है. कैब में सामान भूलने के मामलों में मुंबई ने दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है. यह रिपोर्ट उन रुझानों पर आधारित है, जिनमें यात्री उबर कैब में सामान छोड़ जाते हैं. इन सामानों में बैग, मोबाइल, पर्स और दूसरे जरूरी सामान शामिल हैं.

दिल्ली नंबर दो, पुणे तीसरे स्थान पर

उबर की इस सूची में दिल्ली दूसरे और पुणे तीसरे स्थान पर है, जबकि बेंगलुरु और कोलकाता क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर हैं. हैदराबाद को सबसे कम भुलक्कड़ महानगरीय क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है.

सबसे ज्यादा भूलने वाली चीजें

रिपोर्ट में बताया गया है कि यात्रियों ने सबसे अधिक बैग, मोबाइल फोन, इयरफोन और पर्स जैसे जरूरी सामान कैब में छोड़े. इसके बाद चश्मे, चाबियां और कपड़े भी आमतौर पर छूटने वाली वस्तुओं में शामिल हैं.

अनोखी भूली हुई चीजें

रिपोर्ट में कुछ हैरान करने वाली घटनाएं भी सामने आईं. जैसे एक यात्री अपनी शादी की साड़ी, तो दूसरा सोने का बिस्कुट कैब में भूल गया. इतना ही नहीं, एक यात्री 25 किलो गाय का घी और दूसरा अपना खाना पकाने का चूल्हा भी कैब में छोड़ गया. दूसरी अनोखी वस्तुओं में व्हीलचेयर, बांसुरी, हेयर विग, दूरबीन और हवन कुंड शामिल हैं.

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कब भूलते हैं लोग सबसे ज्यादा सामान?

सप्ताह के दिनों में शनिवार को सबसे ज्यादा सामान कैब में छूटा पाया गया. वहीं, शाम 7 बजे के आसपास का समय सबसे संवेदनशील रहा. त्योहारों और छुट्टियों के दिनों में भी सामान भूलने की घटनाएं अधिक होती हैं.

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कैसे पाएं खोया सामान?

उबर इंडिया और साउथ एशिया के डायरेक्टर शिवा शैलेंद्रन ने बताया कि, “हमने ऐप में सामान खोजने की प्रक्रिया को सरल बना दिया है, ताकि यूजर्स को अपना सामान जल्द वापस मिल सके.”

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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