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Home Business MSME सेक्टर को बड़ी राहत, अब मशीनरी और एक्सपोर्ट के लिए लोन के नियम हुए आसान

MSME सेक्टर को बड़ी राहत, अब मशीनरी और एक्सपोर्ट के लिए लोन के नियम हुए आसान

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MSME सेक्टर को बड़ी राहत, अब मशीनरी और एक्सपोर्ट के लिए लोन के नियम हुए आसान
टेक्सटाइल मिल में काम करती महिलाएं (Photo: Freepik)

MCGS-MSME Scheme Changes: भारत सरकार ने छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को बड़ी राहत देते हुए ‘म्युचुअल क्रेडिट गारंटी स्कीम’ (MCGS-MSME) में बड़े बदलाव किए हैं. शनिवार को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नई गाइडलाइन्स का मकसद मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को रफ्तार देना है. आइए जानते हैं कि इन बदलावों से आपको क्या फायदा होगा. 

क्या अब मशीनरी के लिए लोन लेना आसान होगा?

हां, ANI के रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने नियमों को काफी लचीला बना दिया है. पहले किसी भी प्रोजेक्ट की कुल लागत का 75% हिस्सा मशीनरी पर खर्च करना जरूरी था, जिसे अब घटाकर 60% कर दिया गया है. इसका मतलब है कि अब आप बाकी के 40% फंड का इस्तेमाल अन्य जरूरी कामों के लिए कर सकते हैं. साथ ही, अब सर्विस सेक्टर की कंपनियों को भी इस स्कीम का फायदा मिलेगा. 

लोन चुकाने और गारंटी की समय सीमा क्या है?

छोटे व्यापारियों को लंबे समय तक सपोर्ट देने के लिए सरकार ने गारंटी की अवधि 10 साल तय की है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब भारी-भरकम मशीनरी के लिए लिए गए लोन को आप बिना किसी तनाव के लंबे समय में चुका सकेंगे. 

क्या जमा किया हुआ पैसा वापस मिलेगा?

सरकार ने व्यापारियों की नकदी (Liquidity) बढ़ाने के लिए एक अनोखा कदम उठाया है. अब लोन के समय दी जाने वाली 5% की अग्रिम राशि (Upfront Contribution) रिफंडेबल होगी. अगर आपका लोन अकाउंट सही चलता है, तो चौथे साल से हर साल 1% पैसा आपको वापस मिलना शुरू हो जाएगा. इससे ईमानदार और समय पर पैसा चुकाने वाले बिजनेसमैन को आर्थिक मजबूती मिलेगी. 

एक्सपोर्टर्स के लिए क्या खास ऑफर हैं?

एक्सपोर्ट करने वाली यूनिट्स के लिए सरकार ने और भी दरियादिली दिखाई है:

  • लोन की सीमा: एक्सपोर्टर्स को 20 करोड़ रुपये तक का गारंटीड लोन मिल सकेगा.
  • कम खर्चा: पहले साल की गारंटी फीस पूरी तरह माफ है. दूसरे साल से सिर्फ 0.50% फीस लगेगी.
  • गारंटी कवर: लोन डिफॉल्ट होने की स्थिति में सरकार 75% तक की गारंटी देगी.
  • शर्त: बिजनेस पिछले 3 सालों से मुनाफे में होना चाहिए और कुल टर्नओवर का कम से कम 25% हिस्सा एक्सपोर्ट से आना चाहिए.

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