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Home Business भारत में मलेशिया से पाम तेल निर्यात में फिर तेजी, बाजार हिस्सेदारी 35% पहुंची

भारत में मलेशिया से पाम तेल निर्यात में फिर तेजी, बाजार हिस्सेदारी 35% पहुंची

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भारत में मलेशिया से पाम तेल निर्यात में फिर तेजी, बाजार हिस्सेदारी 35% पहुंची
Palm Oil Import

Palm Oil Import: मलेशिया से भारत में कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का आयात मई और जून 2025 में फिर से बढ़ गया है. मलेशियन पाम ऑयल काउंसिल (एमपीओसी) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी बेलविंदर स्रोन के अनुसार, अब यह आयात प्रति माह लगभग 2.5 लाख टन हो गया है. इससे पहले कुछ समय के लिए इसमें गिरावट देखी गई थी, लेकिन अक्टूबर 2024 के बाद मांग बढ़ने से निर्यात फिर से सुधरा है.

बाजार हिस्सेदारी में वृद्धि

भारत में मलेशिया की पाम तेल बाजार में हिस्सेदारी 2023 में जहां 30% थी, वहीं अब 2025 की पहली छमाही में यह बढ़कर 35% हो गई है. यह वृद्धि भारत में मलेशिया की मजबूत आपूर्ति और प्रतिस्पर्धी कीमतों को दर्शाती है.

त्योहारी मांग से उम्मीदें

बेलविंदर स्रोन ने कहा कि आगामी त्योहारों विशेष रूप से दिवाली के चलते स्टॉक की रीस्टॉकिंग और मूल्य प्रतिस्पर्धा के कारण जुलाई-सितंबर की तीसरी तिमाही में भी पाम तेल निर्यात में सकारात्मक रुझान जारी रहने की संभावना है. एमपीओसी ने पाम तेल के पोषण और टिकाऊपन को बढ़ावा देने के लिए भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ (आईवीपीए) के साथ सहयोग को औपचारिक रूप दिया है. यह साझेदारी मार्च 2025 में ऑयल टेक्नोलॉजिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ओटीएआई) के साथ हुए समझौते के बाद की गई है.

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मलेशिया की वैश्विक स्थिति

मलेशिया वैश्विक स्तर पर पाम तेल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है, जिसकी कुल वैश्विक उत्पादन में 24% हिस्सेदारी है. 193.4 लाख टन उत्पादन के साथ मलेशिया भारत के लिए एक प्रमुख और भरोसेमंद सप्लायर बना हुआ है. बेलविंदर स्रोन ने उम्मीद जताई कि यह निर्यात वृद्धि वर्ष 2025 के अंत तक भी जारी रह सकती है. पिछले पांच वर्षों में भारत में मलेशिया का सालाना औसत निर्यात 25 लाख टन के आसपास बना रहा है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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