New HRA Claim Rule: भारत सरकार ने नये आयकर अधिनियम, 2025 के लिए नियमों और फॉर्म का ड्राफ्ट जारी कर दिया है. इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी रोकना, पारदर्शिता लाना और कंपनियों की जवाबदेही तय करना है. ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे. फिलहाल सरकार ने इस पर स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद अगले महीने फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा.
मकान मालिक के साथ रिश्तों का खुलासा अनिवार्य
अब तक कर्मचारी एचआरए (HRA) क्लेम करते समय केवल किराये की जानकारी देते थे, लेकिन अब प्रस्तावित फॉर्म 124 के तहत उन्हें यह बताना होगा कि मकान मालिक के साथ उनका कोई पारिवारिक या अन्य संबंध तो नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से उन फर्जी दावों पर रोक लगेगी जहां लोग टैक्स बचाने के लिए अपने रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी रेंट रसीदें जमा करते थे.
ऑडिटर्स की बढ़ी जिम्मेदारी
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, विदेशी आय पर टैक्स क्रेडिट (FTC) का दावा करना अब इतना आसान नहीं होगा. प्रस्तावित फॉर्म 44 के तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) को विदेशी टैक्स भुगतान, विनिमय दर (Exchange Rate) और टैक्स संधि (DTAA) की पात्रता की गहराई से जांच करनी होगी. इससे कंपनियों और ऑडिटर्स, दोनों की जिम्मेदारी और काम का बोझ बढ़ेगा.
पैन (PAN) आवेदन के नियमों में बदलाव
कंपनियों के लिए पैन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया अब अधिक सख्त होगी. आवेदन के समय कंपनी को यह स्पष्ट घोषणा देनी होगी कि उनके पास पहले से कोई पैन मौजूद नहीं है. यह कदम एक ही कंपनी या उसकी शाखाओं के नाम पर कई पैन कार्ड होने की समस्या को खत्म करने के लिए उठाया गया है, जिससे डेटा की शुद्धता बनी रहे.
टैक्स ऑडिट रिपोर्ट में अब और भी ज्यादा पारदर्शिता
नए टैक्स ऑडिट फॉर्म 26 के अनुसार, यदि किसी ऑडिटर को कंपनी के खातों में कोई गड़बड़ी या कमी दिखती है, तो उसे यह स्पष्ट करना होगा कि उस गड़बड़ी का कंपनी की आय या मुनाफे पर कितना असर पड़ा है. शेयर मूल्यांकन या राजस्व दिखाने में की गई किसी भी हेराफेरी का अब सीधा असर टैक्स कैलकुलेशन पर दिखेगा.
आईटी सिस्टम और डेटा लोकेशन की देनी होगी जानकारी
डिजिटल दौर में सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, अब कंपनियों को अपने अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड स्टोरेज, सर्वर का आईपी एड्रेस और डेटा किस देश में स्टोर है, इसकी पूरी जानकारी देनी होगी. विशेषकर भारत में स्थित बैकअप सर्वर का पता देना अब अनिवार्य होगा.
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