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Home Business आयकरदाताओं को बड़ी राहत! आईटीआर फाइल करने के लिए बढ़ सकती है डेडलाइन

आयकरदाताओं को बड़ी राहत! आईटीआर फाइल करने के लिए बढ़ सकती है डेडलाइन

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आयकरदाताओं को बड़ी राहत! आईटीआर फाइल करने के लिए बढ़ सकती है डेडलाइन
आईटीआर फाइलन की आखिरी तारीख 15 सितंबर 2025 है.

ITR Filling Deadline: अब तक आयकर रिटर्न (आईटीआर) फाइल नहीं करने वालों के लिए एक राहत भरी खबर है. वह यह है कि आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन को बढ़ाया जा सकता है. इसका कारण यह है कि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीएआई) और टैक्स लॉयर्स ने सरकार से इसकी डेडलाइन को बढ़ाकर 15 अक्टूबर तक करने की मांग की है. हालांकि, आयकर विभाग ने आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख 15 सितंबर, 2025 निर्धारित की है, लेकिन अगर सरकार सीएए और टैक्स वकीलों की मांग को मान लेती है, तो यह एक महीने के लिए बढ़ भी सकती है.

आईसीएआई और एटीबीए ने की सरकार से मांग

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीएआई) और टैक्स वकीलों ने सरकार से आकलन वर्ष (एवाई) 25-26 के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) और ऑडिट की समय सीमा बढ़ाने का आग्रह किया है. उन्होंने ई-फाइलिंग पोर्टल से जुड़ी समस्याओं और फॉर्म जारी होने में हो रही देरी का हवाला दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आईसीएआई और एडवोकेट्स टैक्स बार एसोसिएशन (एटीबीए) ने आईटीआर पोर्टल पर ढेरों त्रुटियों और गड़बड़ियों को देखते हुए आयकर रिटर्न (आईटीआर) और टैक्स ऑडिट की समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है. एटीबीए ने कहा कि गैर-ऑडिट आईटीआर की समय सीमा 15 अक्टूबर, 2025 और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की समय सीमा 30 नवंबर, 2025 होनी चाहिए.

करदाताओं को नहीं मिला समय पर फॉर्म

कर्नाटक राज्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एसोसिएशन (केएससीएए) ने वित्त मंत्रालय को एक ज्ञापन भेजकर तर्क दिया है कि आईटीआर-5, आईटीआर-6, आईटीआर-7 और प्रमुख ऑडिट फॉर्म केवल जुलाई और अगस्त में ही जारी किए गए थे. एसोसिएशन के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है, “आईटीआर फॉर्म 1 अप्रैल तक जारी करने की लंबे समय से चली आ रही परंपरा का एक बार फिर पालन नहीं किया गया है. इस साल, देरी विशेष रूप से गंभीर रही है, जिससे करदाताओं के लिए तैयारी का समय बहुत कम हो गया है.”

बढ़ गया है ऑडिट का बोझ

इसके अलावा, केएससीएए ने तर्क दिया कि अनुपालन का बोझ एक-दूसरे पर हावी होने से चुनौतियां और जटिल हो जाती हैं. इसने कहा कि जीएसटी, एमसीए और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट के लिए वैधानिक फाइलिंग रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा के साथ ओवरलैप होती है. एसोसिएशन ने कहा कि एनसीई वित्तीय पर आईसीएआई के मार्गदर्शन नोट को अपनाने से विस्तृत प्रकटीकरण के कारण ऑडिट का कार्यभार काफी बढ़ गया है. एसोसिएशन के अनुसार, राष्ट्रीय अवकाश और मौसम संबंधी व्यवधानों ने प्रभावी कार्य दिवसों को और कम कर दिया है.

क्यों की जा रही डेडलाइन बढ़ाने की मांग

एडवोकेट्स टैक्स बार एसोसिएशन (एटीबीए) के राष्ट्रीय महासचिव ओम कुमार ने कहा, “एडवोकेट्स टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से मैंने वित्त मंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन दिया है, जिसमें आयकर रिटर्न और अन्य वैधानिक फॉर्म दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया गया है. इस ज्ञापन में कई कारणों से करदाताओं और पेशेवरों को होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों पर प्रकाश डाला गया है. उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में आई भीषण बाढ़ ने सामान्य जीवन और पेशेवर कामकाज को बाधित किया है. इसके अलावा अपडेट आईटीआर फॉर्म देरी से जारी किए गए, ई-फाइलिंग पोर्टल पर तकनीकी गड़बड़ियां मौजूद हैं और मौजूदा त्योहारी सीजन के दौरान अनुपालन का बोझ भी बढ़ा है.

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पहले भी बढ़ चुकी है डेडलाइन

हालांकि, आईटीआर दाखिल करने की समय सीमा एक बार 31 जुलाई, 2025 से बढ़ाकर 15 सितंबर, 2025 कर दी गई थी. वह उन व्यक्तियों के लिए थी, जो आयकर ऑडिट के लिए उत्तरदायी नहीं हैं. टैक्स ऑडिट मामलों के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर, 2025 और इन मामलों में आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर, 2025 है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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