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Indigo Crisis: डीजीसीए ने इंडिगो ऑपरेशन की संभाली कमान, पैसा लौटाने की निगरानी शुरू

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Indigo Crisis: डीजीसीए ने इंडिगो ऑपरेशन की संभाली कमान, पैसा लौटाने की निगरानी शुरू
संकट में घिरी है इंडिगो एयरलाइन्स

Indigo Crisis: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों गंभीर परिचालन चुनौतियों से गुजर रही है. पायलटों और केबिन क्रू के नए ड्यूटी मानदंड लागू करने में विफलता ने कंपनी के संचालन को बुरी तरह प्रभावित किया है. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को कंपनी के मुख्यालय से ही उसके परिचालन, रिफंड प्रक्रिया और यात्रियों से जुड़े मामलों की प्रत्यक्ष निगरानी की कमान संभालनी पड़ी. सूत्रों के अनुसार, डीजीसीए अधिकारी इंडिगो के संचालन पर नजर रखते हुए रोजाना की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे.

मुख्यालय में अधिकारियों की तैनाती

डीजीसीए ने बुधवार को ही यह निर्णय लिया था कि इंडिगो के गुरुग्राम स्थित कॉरपोरेट ऑफिस में अपनी निगरानी समिति के दो अधिकारियों को तैनात किया जाएगा. इनमें एक वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी और एक उप निदेशक शामिल हैं. इन अधिकारियों का मुख्य कार्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रद्द होने की स्थिति का आकलन करना, यात्रियों को धनवापसी की प्रक्रिया की निगरानी करना, समय पर उड़ानों के संचालन की स्थिति पर नजर रखना और नागर विमानन आवश्यकताओं के अनुरूप यात्रियों को मुआवजा देने की प्रक्रिया पर नजर रखना है.

रद्द उड़ानों, स्टाफ तैनाती और रूट पर फोकस

निगरानी समिति का ध्यान विशेष रूप से तीन महत्वपूर्ण पहलुओं कर्मचारियों की तैनाती, अनियोजित अवकाश की स्थिति, और स्टाफ की कमी से प्रभावित रूट पर रहेगा. पिछले सप्ताह से इंडिगो हजारों उड़ानें रद्द कर रही है, जिसने यात्रियों को भारी परेशानियों में डाल दिया है. पांच दिसंबर को यह संकट चरम पर पहुंच गया, जब एक ही दिन में एयरलाइन को रिकॉर्ड 1,600 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं. हालांकि, कंपनी का दावा है कि उसका संचालन अब स्थिर हो चुका है. लेकिन, उड़ानें अभी भी रद्द हो रही हैं और संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

सीईओ को तलब, विस्तृत रिपोर्ट की मांग

इंडिगो की ओर से स्थिति पर सटीक और अपडेटेड जानकारी प्राप्त करने के लिए डीजीसीए ने कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पीटर एल्बर्स को गुरुवार दोपहर तीन बजे अपने कार्यालय में तलब किया. नियामक ने एयरलाइन से परिचालन बाधाओं, रिफंड की स्थिति, कर्मचारी प्रबंधन और उड़ानों की वास्तविक उपलब्धता पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. यह कदम यात्रियों को हो रहे असुविधा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.

11 हवाईअड्डों पर डीजीसीए टीमों का निरीक्षण

डीजीसीए केवल मुख्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने 11 प्रमुख घरेलू हवाईअड्डों पर अपने वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर जाकर इंडिगो की स्थिति का आकलन करने हेतु भेजा है. ये अधिकारी अगले दो से तीन दिनों में संबंधित हवाईअड्डों का दौरा करेंगे और फिर 24 घंटे के भीतर डीजीसीए के उड़ान सुरक्षा विभाग में विस्तृत रिपोर्ट जमा करेंगे. यह कदम सुनिश्चित करेगा कि वास्तविक स्थिति और यात्रियों द्वारा झेली जा रही समस्याओं का सही आकलन हो सके.

ड्यूटी नियम बने संकट का कारण

इंडिगो ने नए ड्यूटी मानदंडों को लागू करने में योजना संबंधी खामियों को स्वीकार किया है. क्रू और पायलटों के रोस्टर में गड़बड़ियों के कारण बड़े पैमाने पर क्रू उपलब्ध नहीं रहा, जिसके चलते उड़ानें संचालित करना मुश्किल हो गया. सुरक्षा मानकों की योजना में कमी के कारण नियामक ने भी एयरलाइन से जवाबदेही की मांग की है.

दैनिक क्षमता में 10% कटौती का निर्देश

वित्त वर्ष 2025-26 के शीतकालीन कार्यक्रम के तहत इंडिगो प्रतिदिन 2,200 से अधिक उड़ानें संचालित कर रही थी. लेकिन मौजूदा संकट को देखते हुए नागर विमानन मंत्रालय ने 10 दिसंबर को निर्देश जारी कर उसकी दैनिक उड़ान क्षमता में 10% कटौती का आदेश दिया है. इसका उद्देश्य है कि एयरलाइन कम उड़ानों के साथ बेहतर तरीके से संचालन संभाल सके और यात्रियों को राहत मिल सके.

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संकट जारी, सुधार की प्रक्रिया शुरू

हालांकि, एयरलाइन का कहना है कि वह स्थिति को सामान्य करने में जुटी है, लेकिन रद्द उड़ानों का सिलसिला थमा नहीं है. डीजीसीए की निगरानी से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि यात्रियों को समय पर रिफंड, मुआवजा और सही जानकारी मिलती रहे. यह हस्तक्षेप इंडिगो के परिचालन को जल्द स्थिर करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है. यह संकट भारतीय विमानन उद्योग के लिए एक बड़ा सबक भी है कि मानव संसाधन प्रबंधन, ड्यूटी नियमों के कार्यान्वयन और संचालन योजना में छोटी चूक भी बड़े पैमाने पर व्यवधान पैदा कर सकती है.

भाषा इनपुट के साथ

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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