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ग्लोबल संकट का असर, डॉलर के सामने पस्त हुआ रुपया

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ग्लोबल संकट का असर, डॉलर के सामने पस्त हुआ रुपया
100-200 रुपये के नोट की सांकेतिक फोटो (Photo: Freepik)

Indian Rupee Record Low: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुक्रवार की सुबह एक चिंताजनक खबर लेकर आई है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिरकर 93.15 रुपये पर पहुंच गया. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने रुपये की कमर तोड़ दी है.

रुपया आखिर गिरा क्यों?

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह खाड़ी देशों में छिड़ी जंग है. इस तनाव के कारण कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल विदेशों से खरीदता है. जब तेल महंगा होता है, तो हमें उसे खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर चुकाने पड़ते हैं. डॉलर की इसी बढ़ती मांग ने रुपये को कमजोर कर दिया है.

डॉलर इतना मजबूत कैसे हो गया?

दुनियाभर में जब भी अनिश्चितता का माहौल होता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश करते हैं. ऐसे में अमेरिकी डॉलर उनकी पहली पसंद बनता है. विदेशी निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से अपना पैसा निकालकर डॉलर में बदलना शुरू कर दिया है. साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की कम संभावना ने भी डॉलर को और ताकत दे दी है.

आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा?

रुपया कमजोर होने का सीधा मतलब है महंगाई.

  • पेट्रोल-डीजल: कच्चा तेल महंगा होने से फ्यूल के दाम बढ़ सकते हैं.
  • महंगा आयात: विदेशों से आने वाली चीजें जैसे मोबाइल, लैपटॉप और खाने का तेल महंगा हो जाएगा.
  • बिजनेस की लागत: कंपनियों के लिए कच्चा माल मंगवाना महंगा होगा, जिसका बोझ अंत में आम जनता पर ही आएगा. 

अब आगे क्या होगा?

बाजार के जानकारों की नजर अब रिजर्व बैंक (RBI) पर टिकी है. क्या RBI दखल देकर रुपये को और गिरने से बचाएगा? फिलहाल, मिडिल ईस्ट के हालात और तेल की कीमतें ही रुपये की अगली चाल तय करेंगी.

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