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Home Business भारत का पहला स्मार्ट गांव, जहां का हर परिवार है इंश्योर्ड और घर-घर में वाई-फाई

भारत का पहला स्मार्ट गांव, जहां का हर परिवार है इंश्योर्ड और घर-घर में वाई-फाई

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भारत का पहला स्मार्ट गांव, जहां का हर परिवार है इंश्योर्ड और घर-घर में वाई-फाई
गुजरात का पंसारी गांव देश का पहला स्मार्ट विलेज

India First Smart Village: आपके सामने जब गांव शब्द आता है, तो आपके मन में किस तरह का अक्स उभरता है? वही, मिट्टी और ईंट से बने कच्चे-पक्के मकान, गलियों में बजबजाती नालियां, टूटी सड़कें, घरों के आगे गोशाला और उसमें बंधी गाएं, किसी घर के आगे पुआल की ढेर और पूरे गांव में एकाध समृद्ध घर दिखाई देगा. लेकिन, क्या आपने कभी यह कल्पना भी की होगी कि भारत में कोई स्मार्ट गांव भी होगा, जहां का हर परिवार इंश्योर्ड हो और घर-घर में वाई-फाई लगा हो? सड़कों पर सिक्योरिटी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हों, स्कूलों में एयर कंडीशन लगा हो और उन स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति सौ फीसदी हो? यह पढ़कर आप कहेंगे कि क्या मजाक करते हैं? लेकिन यह मजाक नहीं, बल्कि हकीकत है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात में एक ऐसा गांव है, जो भारत का पहला स्मार्ट गांव है. उस गांव का नाम पुंसारी गांव है, जो आज पूरे देश के लिए एक मिसाल बना हुआ है. आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

स्मार्ट गांव का मॉडल है पुंसारी गांव

अंग्रेजी की वेबसाइट मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात का यह छोटा सा गांव पुंसारी गांव आज पूरे देश के लिए स्मार्ट गांव का मॉडल बन चुका है. कुछ साल पहले यह गांव भी कई दूसरे गांवों की तरह बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस कर रहा था. लेकिन गांव के नेताओं और वहां के लोगों की साझा मेहनत ने इसे आधुनिक और सुरक्षित गांव में बदल दिया.

बुनियादी सुविधाओं में सुधार

रिपोर्ट में कहा गया है कि पुंसारी गांव के हर घर में अब टॉयलेट है. गलियां साफ-सुथरी हैं, अच्छी रोशनी और ड्रेनेज सिस्टम मौजूद है. स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए गांव में एक प्राइमरी हेल्थ सेंटर भी स्थापित किया गया है. इससे न केवल ग्रामीणों की सेहत बेहतर हुई है, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सुधार आया है.

टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल

पुंसारी गांव को सबसे अलग बनाने वाला पहलू टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल है. पूरे गांव में वाई-फाई नेटवर्क मौजूद है, जिससे स्टूडेंट्स, किसान और दुकानदार मुफ़्त इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं. सार्वजनिक स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और पब्लिक एड्रेस सिस्टम पूरे गांव में जरूरी अनाउंसमेंट करने में मदद करता है.

बच्चों की शिक्षा पर जोर

पुंसारी गांव की सफलता में सबसे बड़ी वजह जीरो स्कूल ड्रॉपआउट है. हर बच्चा नियमित तौर पर स्कूल जाता है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाता है. स्कूलों में वाई-फाई और कंप्यूटर क्लास लगाई गई हैं. क्लासरूम में गर्मी से बचाव के लिए एयर कंडीशन भी लगाया गया है. क्लासरूम में सीसीटीवी मॉनिटरिंग से पढ़ाई की क्वालिटी सुनिश्चित की जाती है. मिड-डे मील योजना से बच्चों को पौष्टिक भोजन भी मिलता है, जिससे एटेंडेंस बढ़ता है.

रोजगार और ग्रामीण विकास

स्मार्ट सुविधाओं और बेहतर शिक्षा के कारण रोजगार के अवसर गांव में बढ़ गए हैं. पहले लोग काम की तलाश में बड़े शहरों जैसे मुंबई और अहमदाबाद जाते थे, लेकिन अब गांव में ही नौकरी और बिजनेस मौके मिल रहे हैं. इससे परिवार अपनी जड़ों के करीब रहते हुए भी बेहतर जीवन जी सकते हैं.

सरकारी और राष्ट्रीय मान्यता

पुंसारी गांव की उपलब्धियों ने सरकार का ध्यान खींचा है. इसे स्मार्ट गांव मॉडल के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है. अधिकारी और नीति निर्माता पुंसारी गांव का अध्ययन करके देश भर में ऐसे आइडियल गांव बनाने की योजना तैयार कर रहे हैं.

पुंसारी से सबक लेने वाली बातें

इस गांव सबक लेने वाली बात यह है कि साफ सोच, टेक्नोलॉजी और समुदाय की मेहनत से ग्रामीण भारत में आधुनिक और खुशहाल जीवन लाया जा सकता है. शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और डिजिटल एक्सेस में सुधार ने पुंसारी को एक आदर्श मॉडल बना दिया है.

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ग्रामीण भारत का मॉडर्न हब

पुंसारी गांव पूरे देश में एक जीता-जागता मिसाल है कि कैसे ग्रामीण भारत में स्मार्ट टेक्नोलॉजी, सुरक्षा और शिक्षा के जरिए खुशहाल जीवन संभव है. यह गांव न केवल गुजरात, बल्कि पूरे भारत के लिए स्मार्ट डेवलपमेंट का मॉडल बन गया है, जो भविष्य के गांवों के लिए दिशा-निर्देश भी तय करता है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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