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Home Business आखिरकार घुटने पर आ ही गई महंगाई, सितंबर में 2017 के बाद का सबसे निचला स्तर

आखिरकार घुटने पर आ ही गई महंगाई, सितंबर में 2017 के बाद का सबसे निचला स्तर

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आखिरकार घुटने पर आ ही गई महंगाई, सितंबर में 2017 के बाद का सबसे निचला स्तर
Retail Inflation

Retail Inflation: आखिरकार खुदरा महंगाई घुटने पर आ ही गई. सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा महंगाई (रिटेल इन्फ्लेशन) सितंबर 2025 में 1.54% पर आ गई. यह आंकड़ा पिछले आठ वर्षों में सबसे कम है और जून 2017 के बाद का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है. इस गिरावट ने आम आदमी की जेब पर राहत दी है और उपभोक्ताओं के लिए मूल्य वृद्धि के दबाव को कम किया है.

खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट

सितंबर में महंगाई में जोरदार गिरावट मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार कमी के कारण हुई. उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीपीआई) 2.28% दर्ज किया गया, जो जून 2025 से खाद्य कीमतों के नकारात्मक क्षेत्र में होने का संकेत है. इस तरह की गिरावट लगातार चौथे महीने दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर दबाव कम हो गया है.

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मुद्रास्फीति

आंकड़ों से पता चला कि ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई 1.07%, जबकि शहरी क्षेत्रों में 2.04% रही. खाद्य महंगाई ग्रामीण क्षेत्रों में -2.17% और शहरी क्षेत्रों में -2.47% रही. इस गिरावट का प्रमुख कारण सब्जियों, खाद्य तेलों, फलों, अनाज, दालों और अंडों की कीमतों में कमी है.

नियंत्रण में रही दूसरे क्षेत्रों की महंगाई

खाद्य श्रेणियों में गिरावट के अलावा गैर-खाद्य वस्तुओं में भी मुद्रास्फीति नियंत्रण में रही. विशेष रूप से ईंधन और प्रकाश की कीमतों में स्थिरता ने महीने के दौरान ऊर्जा पर दबाव कम किया.

  • हाउस (शहरी क्षेत्रों के लिए): 3.98%
  • एजुकेशन: 3.44%
  • हेल्थ: 4.34%
  • ट्रांसपोर्ट और टेलिकॉम: 1.82%
  • फ्यूल और लाइट: 1.98%

कैसे घटी महंगाई

मंत्रालय ने कहा कि इस गिरावट का कारण “अनुकूल आधार प्रभाव” और सब्जियां, तेल और वसा, फल, अनाज, दालें, अंडे तथा ईंधन एवं प्रकाश जैसी प्रमुख श्रेणियों में कीमतों में कमी है. यह मिश्रित प्रभाव महंगाई दर को साल-दर-साल 1.54% तक सीमित करने में मदद करता है.

कहां से जुटाए गए आंकड़े

सितंबर के आंकड़े सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,181 गांवों और 1,114 शहरी बाजारों से एकत्र किए गए. ग्रामीण बाजारों का कवरेज 99.83% और शहरी बाजारों का कवरेज 98.56% रहा. इससे यह सुनिश्चित हुआ कि आंकड़े राष्ट्रीय स्तर पर वास्तविक और प्रतिनिधि हैं.

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उपभोक्ताओं के लिए क्या मतलब है यह डेटा?

इस गिरावट का मतलब है कि आम आदमी को खाने-पीने की चीजों और अन्य जरूरी वस्तुओं पर कीमतों के बढ़ने का दबाव कम हुआ है. लगातार चार महीनों से खाद्य मुद्रास्फीति नकारात्मक क्षेत्र में होने से उपभोक्ताओं को अल्पकालिक राहत मिली है. साथ ही, ईंधन की कीमतों में स्थिरता ने परिवहन और दैनिक खर्चों पर नियंत्रण बनाए रखा.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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