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Home Business फर्जी तरीके से हासिल किया रिफंड तो पीछे पड़ जाएगा इनकम टैक्स, फिर बढ़ेगी परेशानी

फर्जी तरीके से हासिल किया रिफंड तो पीछे पड़ जाएगा इनकम टैक्स, फिर बढ़ेगी परेशानी

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फर्जी तरीके से हासिल किया रिफंड तो पीछे पड़ जाएगा इनकम टैक्स, फिर बढ़ेगी परेशानी
Income Tax Refund

Income Tax Refund: नौकरी-पेशा करने वालों ने आयकर रिटर्न (आईटीआर) तो दाखिल कर ही दिया होगा, क्योंकि टैक्स डिडक्शन का बेनिफिट उठाना होगा. अब रिफंड पाने की बारी आ गई है. अगर आपने टैक्स बचाने और रिफंड पाने के चक्कर में आईटीआर में गलत या फर्जी जानकारी दी है, तो सावधान हो जाइए. आयकर विभाग (इनकम टैक्स डिपार्टमेंट) ने अब ऐसा तरीका ईजाद कर लिया है कि आपका झूठ तुरंत पकड़ में आ जाएगा. इसीलिए, अगर टैक्स रिफंड पाने के लिए आपने भी फर्जी जानकारियां दी हैं, तो सावधान हो जाइए. इनकम टैक्स आपके पीछे पड़ जाएगा. फिर आपकी परेशानी बढ़ जाएगी.

टैक्सपेयर्स ऐसे देते हैं फर्जी जानकारी

आम तौर पर टैक्स डिडक्शन का बेनिफिट उठाने के लिए आईटीआर दाखिल करते समय टैक्सपेयर्स फर्जी हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए), फर्जी ट्यूशन फीस, बोगस डोनेशन, खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर लिख देते हैं. वह ऐसा यह सोचकर करते हैं कि वे जो जानकारी दे रहे हैं, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को उसकी भनक तक नहीं लगेगी. लेकिन, उनकी यह सोच बिल्कुल निरर्थक और बेबुनियाद है.

फर्जी जानकारियों को पता लगाने में जुटा इनकम टैक्स

अगर आपने आईटीआर दाखिल करते समय फर्जी जानकारियां दी है, तो इनकम टैक्स विभाग ऐसे मामलों की जांच करने की तैयारी में जुट गया है. इनकम टैक्स विभाग वित्त वर्ष 2023-24 या आकलन वर्ष 2024-25 के दौरान हाई-रिस्क वाले रिफंड के दावों का सत्यापन करने वाला है. इस सत्यापन का उद्देश्य संगठित तौर पर या किसी व्यक्ति की ओर से गलत जानकारी देकर टैक्स रिफंड पाने के मकसद का पता लगाना है. इनकम टैक्स विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि क्या एक ही कॉमन ईमेल आईडी या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर फर्जी हाउस रेंट अलाउंस, बोगस डोनेशंस के जरिए 80जी के तहत टैक्स डिडक्शन का दावा तो नहीं किया गया है. कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी ने अपने खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है.

आईटीआर की गहन जांच के लिए एसओपी जारी

ऐसे मामलों में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके द्वारा दाखिल आईटीआर की गहन जांच कर सकता है. वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाला डायरेक्टोरेट ऑफ इनकम टैक्स सिस्टम्स ने ऐसे हाई रिस्क इनकम टैक्स रिफंड मामलों के लिए एसओपी इंस्ट्रक्शंस जारी किए हैं जो एसेसिंग ऑफिसर्स, टीडीएस चार्ज ऑफिसर्स और इंवेस्टिगेशन विंग में अधिकारियों को उपलब्ध करा दिया गया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के जांच दल अधिकारियों को भेजे गए एसओपी में कहा गया है कि पूर्व में टीडीएस क्रेडिट के गलत दावे कर, आय को कम दिखाकर, डिडक्शन को बढ़ाकर दिखाकर और बोगस खर्चे दिखाकर गलत तरीके से रिफंड क्लेम किया गया है. ये मामला तब सामने आया है, जब ये पाया गया कि एक ही कॉमन ईमेल आईडी या मोबाइल फोन नंबर का इस्तेमाल कर आयकर रिटर्न फाइल किया गया है. अब इसे सेंट्रल रिजिस्ट्री यूनिट्स के नोडल ऑफिसर्स को आगे की जांच के लिए फॉरवर्ड कर दिया गया है.

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टैक्सपेयर्स को जारी होगा नोटिस

एसओपी में टैक्स अधिकारियों से इनसाइट पोर्टल, ई-फाइलिंग पोर्टल का इस्तेमाल कर उस व्यक्ति का पता लगाने का निर्देश दिया गया है, जो कॉमन ईमेल आईडी और मोबाइल फोन नंबर से जुड़ा है. ऐसे टैक्सपेयर्स को नोटिस जारी कर टैक्स छूट, डिडक्शन, और खर्चों से जुड़ी जानकारियों को डॉक्यूमेंट के साथ वेरिफाई करने के लिए कहा जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की इस कार्रवाई का मकसद टैक्सपेयर्स को प्रताड़ित करना नहीं है. अगर टैक्स रिफंड के दावे सही हैं, तो मामले को बंद कर दिया जाएगा. वहीं, अगर गलत जानकारियां देकर रिफंड हासिल करने की कोशिश की गई है, तो एसओपी के मुताबिक मामले की गहन जांच की जाएगी. इसके बाद टैक्सपेयर की परेशानी बढ़ जाएगी.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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