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Income Tax: 37 लाख की आय, 14 लाख पर विवाद, फिर भी ITAT से क्लीन चिट

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Income Tax: 37 लाख की आय, 14 लाख पर विवाद, फिर भी ITAT से क्लीन चिट

Income Tax: कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर तालुक के पेट्रोल पंप मालिक श्रीनिवासप्पा पर इनकम टैक्स विभाग ने आरोप लगाया था कि उनकी बैंक अकाउंट्स में जमा हुआ 14.10 लाख रुपये का कैश “अनएक्सप्लेंड मनी” है. AO (जांच अधिकारी) और CIT(A) ने ये मान लिया कि SBI और HDFC बैंक को इन कैश डिपॉजिट का स्रोत पता नहीं है, इसलिए Section 69A के तहत इसे टैक्सेबल इनकम मानकर जोड़ दिया गया.

Section 69A आखिर कहता क्या है?


इनकम टैक्स कानून की यह धारा तब लागू होती है जब किसी व्यक्ति के पास ऐसी नकदी मिलती है जो उसके खातों में दर्ज ना हो और जिसका सही स्रोत न बताया जा सकता है. इसका मतलब यह है की अनएक्सप्लेंड और अनरिकॉर्डेड कैश हो तभी ये सेक्शन लागू होता है.

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श्रीनिवासप्पा ने कैसे दी सफाई?


श्रीनिवासप्पा ने ITAT में साबित किया कि उनका पेट्रोल पंप बिजनेस 37 करोड़ रुपये से ज्यादा टर्नओवर वाला है और उनकी पूरी बुक्स ऑडिटेड हैं. उन्होंने कैश बुक, डेट-वाइज डिटेल्स और रिकन्सिलिएशन स्टेटमेंट्स दिखाए कि 14.10 लाख रुपये का पूरा कैश बिजनेस की आमदनी है और पहले से ही अकाउंट्स में दर्ज है. उन्होंने ये भी कहा कि AO ने किसी बैंक अकाउंट नंबर तक की सटीक जानकारी नहीं दी है. जबकि उनके खातों में करोड़ों की ट्रांजैक्शंस होती रहती हैं, तो सिर्फ 14 लाख रुपये पर शक करना ही गलत है.

ITAT ने क्या कहा?


ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि जब पैसा पहले से ही किताबों में दर्ज है और उसका स्रोत साबित है, तो Section 69A लागू ही नहीं हो सकता है. AO ने बिना ठोस जांच के आरोप लगाए, इसलिए पूरा एडिशन ही गलत था. ITAT ने आदेश दिया कि 14.10 लाख रुपये की यह जोड़ी गई इनकम तुरंत हटाई जाए. अदालत ने यह भी कहा कि जब करदाता ने सभी सबूत दे दिए, तो केस वापस AO को भेजने की जरूरत नहीं है. यह फैसला बताता है कि टैक्स अधिकारी सिर्फ शक के आधार पर टैक्स नहीं बढ़ा सकते, खासकर तब जब सब रिकॉर्ड में साफ लिखा हो.

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