[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Business जेब पर भारी न पड़ जाए सरकारी रेट, घर लेने से पहले जानें क्या होता है ये सर्कल रेट 

जेब पर भारी न पड़ जाए सरकारी रेट, घर लेने से पहले जानें क्या होता है ये सर्कल रेट 

0
जेब पर भारी न पड़ जाए सरकारी रेट, घर लेने से पहले जानें क्या होता है ये सर्कल रेट 
Importance of Circle Rate in Property (Photo: Freepik)

Importance of Circle Rate in Property: जब भी हम घर या जमीन खरीदने की बात करते हैं, तो अक्सर ‘सर्कल रेट’ (Circle Rate) का नाम सामने आता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सरकारी रेट आपके घर के बजट को कैसे घटा या बढ़ा सकता है? आसान शब्दों में कहें तो सर्कल रेट वह न्यूनतम कीमत है, जिससे कम पर आप किसी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री नहीं करा सकते. इसे राज्य सरकारें तय करती हैं ताकि स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस का सही आकलन किया जा सके.

प्रॉपर्टी का रेट सरकार कैसे तय करती है?

सरकार हर इलाके के लिए एक जैसा रेट नहीं रखती. इसके पीछे कई ठोस वजहें होती हैं:

  • लोकेशन और सुविधाएं: अगर प्रॉपर्टी किसी पॉश इलाके में है, जहां स्कूल, अस्पताल और मेट्रो जैसी सुविधाएं पास हैं, तो वहां का सर्कल रेट ज्यादा होगा.
  • प्रॉपर्टी का प्रकार: कमर्शियल (दुकान/ऑफिस) प्रॉपर्टी का रेट रेजिडेंशियल (घर) से अलग और अक्सर ज्यादा होता है.
  • उम्र और साइज: नई बिल्डिंग और पुरानी बिल्डिंग के रेट में फर्क होता है. साथ ही, फ्रीहोल्ड और लीजहोल्ड जमीन की कीमतें भी अलग-अलग तय की जाती हैं.

आमतौर पर रेवेन्यू विभाग हर 1 से 3 साल में इन रेट्स की समीक्षा करता है ताकि वे बाजार की असली कीमतों के करीब रह सकें.

क्या सर्कल रेट से टैक्स और रजिस्ट्री का खर्च बढ़ जाता है?

जी हां, सर्कल रेट सीधे आपकी जेब पर असर डालता है. नियम यह है कि स्टैंप ड्यूटी हमेशा उस कीमत पर लगती है जो सर्कल रेट और एक्चुअल मार्केट रेट में से ज्यादा हो.

मान लीजिए आपने एक घर 1 करोड़ रुपये में खरीदा, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड (सर्कल रेट) के हिसाब से उस इलाके की वैल्यू 1.5 करोड़ रुपये है. ऐसी स्थिति में आपको टैक्स 1.5 करोड़ रुपये के आधार पर ही देना होगा.  सरकार ऐसा इसलिए करती है ताकि लोग टैक्स बचाने के लिए प्रॉपर्टी की कीमत कागजों पर कम न दिखा सकें. 

होम लोन मिलने में सर्कल रेट का क्या रोल है?

लोन लेते समय बैंक आपकी प्रॉपर्टी की वैल्यू चेक करते हैं. बैंक ‘लोन-टू-वैल्यू’ (LTV) रेशियो देखते हैं. अगर किसी इलाके का सर्कल रेट काफी कम है और आप वहां महंगी प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, तो बैंक सर्कल रेट के आधार पर ही लोन की लिमिट तय कर सकता है. अगर सर्कल रेट कम हुआ, तो आपको लोन भी कम मिलेगा. इसका मतलब है कि आपको अपनी जेब से ‘डाउन पेमेंट’ के रूप में ज्यादा पैसा देना पड़ेगा. इसलिए घर फाइनल करने से पहले उस एरिया का सर्कल रेट जरूर चेक कर लेना चाहिए.

खरीदार के लिए यह जानना क्यों जरूरी है?

सर्कल रेट सिर्फ एक सरकारी नंबर नहीं है, बल्कि यह खरीदार के लिए एक गाइड की तरह काम करता है:

  1. फेयर प्राइस का अंदाजा: इससे आपको पता चलता है कि प्रॉपर्टी की कम से कम कीमत कितनी होनी चाहिए. अगर कोई आपको सर्कल रेट से बहुत कम में प्रॉपर्टी दे रहा है, तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए. 
  2. बजट प्लानिंग: रजिस्ट्री और स्टैंप ड्यूटी का सटीक खर्चा निकालने में मदद मिलती है. 
  3. पारदर्शिता: यह काले धन (Black Money) के लेनदेन को रोकने में मदद करता है और रियल एस्टेट सेक्टर में ईमानदारी लाता है. 

अगली बार जब आप प्रॉपर्टी की डील करें, तो सिर्फ बेचने वाले की बताई कीमत न देखें, बल्कि सरकारी ‘रेडी रेकनर रेट’ भी जरूर चेक करें. 

ये भी पढ़ें: ग्रेटर नोएडा में घर लेना हुआ महंगा: सर्किल रेट बढ़ने से कितना खाली होगा आपका जेब ? जानें सबकुछ

Disclaimer: शेयर बाजार से संबंधित किसी भी खरीद-बिक्री के लिए प्रभात खबर कोई सुझाव नहीं देता. हम बाजार से जुड़े विश्लेषण मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकिंग कंपनियों के हवाले से प्रकाशित करते हैं. लेकिन प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही बाजार से जुड़े निर्णय करें.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel