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Home Business Budget 2026: क्या बैंक FD पर टैक्स खत्म होगा? SBI की इन 5 सिफारिशों ने मचाई खलबली!

Budget 2026: क्या बैंक FD पर टैक्स खत्म होगा? SBI की इन 5 सिफारिशों ने मचाई खलबली!

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Budget 2026: क्या बैंक FD पर टैक्स खत्म होगा? SBI की इन 5 सिफारिशों ने मचाई खलबली!
Budget 2026

Budget 2026: आगामी केंद्रीय बजट 2026 को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. इस बीच, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है, जिसमें सरकार से कर प्रणाली, बीमा और पेंशन क्षेत्र में बड़े बदलाव करने की अपील की गई है. SBI का मानना है कि इन सुधारों से न केवल आम आदमी की बचत बढ़ेगी, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी.

बैंक डिपॉजिट पर टैक्स राहत: म्यूचुअल फंड के बराबर का दर्जा

SBI की रिपोर्ट में गिरती बैंक बचत (Bank Deposits) पर चिंता जताई गई है. वित्त वर्ष 2024 में कुल घरेलू बचत में बैंक जमा का हिस्सा 38.7% था, जो 2025 में घटकर 35.2% रह गया है.

इसे सुधारने के लिए SBI ने सुझाव दिया है

  • टैक्स समानता: बैंक जमा से होने वाली ब्याज आय पर टैक्स की दर वही होनी चाहिए जो म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार के शॉर्ट टर्म (STCG) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर होती है.
  • लॉक-इन पीरियड में कमी: वर्तमान में टैक्स बचाने वाली FD के लिए 5 साल का लॉक-इन पीरियड है. SBI चाहता है कि इसे घटाकर 3 साल किया जाए, ताकि यह ELSS (Equity Linked Savings Schemes) के बराबर आकर्षक बन सके.
  • TDS से राहत: छोटे बचतकर्ताओं को राहत देने के लिए बचत खाते (Savings Account) के ब्याज पर से TDS हटाने या इसकी सीमा बढ़ाने की सिफारिश की गई है.

बीमा क्षेत्र में गिरावट और सुधार की मांगI

RDAI के आंकड़ों के अनुसार, भारत में बीमा की पहुंच (Penetration) कम हो रही है. वित्त वर्ष 2022 में यह 4.2% थी, जो 2025 तक गिरकर 3.7% पर आ गई है.

  • 2047 का लक्ष्य: SBI ने चेतावनी दी है कि यदि जीवन बीमा में आ रही गिरावट को नहीं रोका गया, तो “2047 तक सभी के लिए बीमा” का मिशन मुश्किल हो सकता है.
  • क्लेम से जुड़ी समस्याएं: रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2025 में लगभग 69% शिकायतें केवल इंश्योरेंस क्लेम से संबंधित थीं. इसके समाधान के लिए स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में कड़े सुधारों की जरूरत है.

GST नियमों में स्पष्टता और सरलता

बैंकों को GST नियमों के पालन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे अदालती मामले (Litigation) बढ़ रहे हैं. SBI ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं.

  • ISD में संशोधन: ‘इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर’ (ISD) से जुड़े शब्दों में बदलाव ताकि बैंकों द्वारा किए गए वितरण पर कोई विवाद न हो.
  • TDS से छूट: NPCI, Visa और MasterCard जैसे गेटवे के माध्यम से होने वाले वास्तविक समय (Real-time) के लेन-देन पर GST TDS लागू नहीं होना चाहिए. वर्तमान में बैंकों को पहले TDS भरना पड़ता है और फिर रिफंड का इंतजार करना पड़ता है, जो एक जटिल प्रक्रिया है.

न्यूनतम गारंटी की जरूरत

बुढ़ापे की लाठी को मजबूत करने के लिए SBI ने एक सुव्यवस्थित पेंशन प्रणाली की वकालत की है. रिपोर्ट के अनुसार, सरकार को एक ऐसी प्रणाली लानी चाहिए जिसमें न्यूनतम पेंशन की गारंटी हो. इससे असंगठित क्षेत्र के कामगारों और मध्यम वर्ग को सामाजिक सुरक्षा (Social Security) मिल सकेगी.

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अभिषेक पाण्डेय पिछले 4 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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