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Home Badi Khabar 2000 के नोट पर एचडीएफसी बैंक का आया बड़ा अपडेट, जानें पूरी बात

2000 के नोट पर एचडीएफसी बैंक का आया बड़ा अपडेट, जानें पूरी बात

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2000 के नोट पर एचडीएफसी बैंक का आया बड़ा अपडेट, जानें पूरी बात
Kanpur: A man holds Rs 2000 currency notes at a bank in Kanpur, Tuesday, May 23, 2023. The Reserve Bank of India has announced for withdrawal of Rs 2,000 currency notes from circulation, and existing notes in circulation can either be deposited in bank accounts or exchanged by September 30. (PTI Photo)(PTI05_23_2023_000081A) *** Local Caption *** 65-year-old Gulab Singh deposit the 2000 note, at Bob kabadi market branch,Tuesday, May 23, 2023. Photo/Rahul Shukla

भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले महीने यह घोषणा की थी कि 2000 का नोट चलन से बाहर हो जायेगा, इसलिए जिनके पास भी 2000 का नोट है वे 30 सितंबर तक या तो इसे बैंक में जमा करवा दें या फिर इसे बदल दें. नोट बदलने की प्रक्रिया 23 मई से शुरू हुई है, जो 30 सितंबर तक जारी रहेगी. बैंक की इसी घोषणा पर एचडीएफसी बैंक ने अपने ग्राहकों को सूचित करते हुए कुछ गाइडलाइन जारी किये हैं, जो इस प्रकार हैं-

2000 का नोट पूरी तरह वैध

बैंक ने अपने ग्राहकों को बताया है कि 2000 का नोट बंद नहीं हुआ है और यह पूरी तरह से वैध है इसलिए ग्राहक इसका इस्तेमाल बाजार में बेहिचक कर सकते हैं. साथ ही बैंक ने ग्राहकों को कहा है कि अगर उन्हें कोई दो हजार रुपये का नोट देता है तो वे इसे सहर्ष स्वीकार करें, क्योंकि इससे ना तो उन्हें कोई परेशानी होगी और ना ही यह कहीं से भी गलत है.

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नोट जमा करने में कोई सीमा तय नहीं

बैंक ने अपने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे बिना किसी परेशानी के दो हजार रुपये का नोट बैंक की किसी भी शाखा में जमा कर सकते हैं, इसमें उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी. बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि डिपोजिट करने में कोई ऊपरी सीमा तय नहीं की गयी है.

30 सितंबर तक नोट बदले जायेंगे

एचडीएफसी बैंक ने अपने ग्राहकों को सूचित किया है कि देशभर में उनकी किसी भी शाखा में बिना किसी बाधा या परेशानी के 2000 रुपये के नोट बदले जा रहे हैं. यह काम 23 मई से शुरू हो गया है और 30 सितंबर तक जारी रहेगा. इसलिए ग्राहक बैंक जायें और आसानी से नोट बदल लें. बैंक ने अपने ग्राहकों से कहा है कि आपकी संतुष्टि और भरोसा ही हमारी पूंजी है, इसलिए हमने 2000 रुपये के नोट को लेकर यह जानकारी आपको दी है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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