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Home Business H-1B Visa: ट्रंप के एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाने से फोर्ड की बढ़ी मुश्किलें, अमेरिका में नहीं मिल रहे कुशल कर्मचारी

H-1B Visa: ट्रंप के एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाने से फोर्ड की बढ़ी मुश्किलें, अमेरिका में नहीं मिल रहे कुशल कर्मचारी

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H-1B Visa: ट्रंप के एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाने से फोर्ड की बढ़ी मुश्किलें, अमेरिका में नहीं मिल रहे कुशल कर्मचारी
फोर्ड मोटर कंपनी के सीईओ जिम फॉर्ले

H-1B Visa: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से एच-1बी वीजा शुल्क में बढ़ोतरी करने का असर खुद उनके ही देश में दिखाई देने लगा है. आलम यह है कि एच-1बी वीजा शुल्क में बढ़ोतरी के बाद अमेरिका में कुशल श्रमिकों की कमी आ गई है. इसी का नतीजा है कि अमेरिकी ऑटोमोटिव कंपनी फोर्ड मोटर को हाई सैलरी वाले कुशल श्रमिक नहीं मिल रहे हैं. उसे हाई सैलरी वाले कुशल श्रमिकों के 5000 रिक्त पदों को भरने में ही हवा निकल रही है.

अमेरिका में कुशल श्रमिकों की भारी कमी

अंग्रेजी की वेबसाइट मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, फोर्ड के सीईओ जिम फार्ले ने हाल ही में कहा है कि अमेरिका कुशल श्रमिकों की भारी कमी का सामना कर रहा है. वाहन निर्माता कंपनी 120,000 डॉलर (करीब 1 करोड़ रुपये) तक के वेतन की पेशकश के बावजूद 5,000 मैकेनिक पदों को भरने के लिए संघर्ष कर रही है, जो औसत अमेरिकी वेतन का लगभग दोगुना है. फार्ले ने ऑफिस आवर्स: बिजनेस एडिशन पॉडकास्ट पर यह टिप्पणी की और इस स्थिति को “चेतावनी” बताया.

अमेरिका में 10 लाख से अधिक पद खाली

जिम फॉर्ले ने होस्ट मोनिका लैंगली से कहा कि यह समस्या फोर्ड से आगे तक फैली हुई है. उन्होंने कहा, “हमारे पास महत्वपूर्ण नौकरियों में दस लाख से ज्यादा पद खाली हैं. इनमें आपातकालीन सेवाएं, ट्रकिंग, फैक्टरी कर्मचारी, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन और कारीगर के पद शामिल हैं. यह बहुत गंभीर बात है.”

शिक्षा और प्रशिक्षण में कमी

कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने में लगने वाले समय के बारे में विस्तार से बताते हुए फोर्ड के सीईओ ने कहा कि फोर्ड सुपर ड्यूटी ट्रक से डीजल इंजन निकालना सीखने में कम से कम पांच साल लगते हैं. उन्होंने इस समस्या के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण की कमी को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा व्यवस्था मानकों पर खरी नहीं उतर रही है.

अगली पीढ़ी को शिक्षित नहीं किया जा रहा

फॉर्ले ने कहा कि फोर्ड जैसी यांत्रिक नौकरियों ने ही अमेरिका को “आज जैसा है” बनाया और उनके दादा जैसे लोगों को, जो कंपनी में कर्मचारी संख्या 389 थे, अच्छी जिंदगी जीने का मौका दिया. उन्होंने कहा, “हम अपने दादा जैसे अगली पीढ़ी के लोगों को शिक्षित करने में निवेश नहीं कर रहे हैं, जिनके पास कुछ भी नहीं था. उन्होंने एक मध्यमवर्गीय जीवन और अपने परिवार के लिए एक भविष्य बनाया.”

ट्रंप प्रशासन ने वीजा नियमों को बनाया सख्त

फोर्ड के सीईओ की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी देश में कुशल श्रमिकों को लाने की जरूरत को स्वीकार किया है. हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने वीज़ा नियमों को कड़ा कर दिया है, जिससे ऐसे श्रमिकों की तलाश करने वाले संगठनों के लिए काम मुश्किल हो गया है.

ट्रंप प्रशासन ने बढ़ाया एच-1बी वीजा शुल्क

यह उनके प्रशासन की ओर से एच-1बी वीजा पर 100,000 डॉलर का आवेदन शुल्क लगाए जाने के कुछ महीने बाद आया है. यह एक ऐसा कार्यक्रम है, जिस पर प्रमुख अमेरिकी कंपनियां (खासकर तकनीकी क्षेत्र की कंपनियां) विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करने के लिए काफी निर्भर रहती हैं.

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क्या कहते हैं ट्रंप

फॉक्स न्यूज की लॉरा इंग्राहम के साथ एक साक्षात्कार में मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप से पूछा गया कि क्या एच-1बी वीजा उनकी प्राथमिकता बनी रहेगी, जिस पर इंग्राहम ने तर्क दिया कि यह कार्यक्रम घरेलू मजदूरी बढ़ाने के उनके प्रयासों के साथ टकराव पैदा कर सकता है. ट्रंप ने कहा, “आपको प्रतिभाओं को भी लाना होगा.” जब इंग्राहम ने कहा कि अमेरिका में पहले से ही “बहुत सारे प्रतिभाशाली लोग” हैं, तो उन्होंने कहा, “नहीं, आपको नहीं लाना है.” उन्होंने कहा, “आपके पास कोई खास प्रतिभा नहीं होती और आपको सीखनी ही होगी. लोगों को सीखना होगा. आप लोगों को बेरोजगारी की कतार में खड़ा करके यह नहीं कह सकते कि मैं तुम्हें किसी फ़ैक्ट्री में लगा दूंगा. हम मिसाइलें बनाएंगे.”

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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