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Home Business 2047 तक सिंगल टैक्स स्लैब बनकर रह जाएगा जीएसटी, सेल और सर्विस टैक्स का खुलेगा रास्ता

2047 तक सिंगल टैक्स स्लैब बनकर रह जाएगा जीएसटी, सेल और सर्विस टैक्स का खुलेगा रास्ता

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2047 तक सिंगल टैक्स स्लैब बनकर रह जाएगा जीएसटी, सेल और सर्विस टैक्स का खुलेगा रास्ता
GST

GST: वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) स्लैब में सुधारों के बीच एक अहम बात यह भी निकलकर सामने आ रही है कि साल 2047 तक जीएसटी में केवल सिंगल स्लैब ही रह जाएगा. इससे सेल और सर्विस टैक्स का रास्ता खुलेगा. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने शनिवार को कहा है कि जीएसटी सुधारों के तहत भारत 2047 तक एकल कर स्लैब की ओर बढ़ सकता है. मौजूदा चार स्लैब (5%, 12%, 18% और 28%) की जगह सिर्फ दो स्लैब 5% और 18% रहेंगे. इसके बाद धीरे-धीरे एकल बिक्री और सेवा कर व्यवस्था लागू हो सकती है.

अगली पीढ़ी का जीएसटी: क्रांतिकारी सुधार

इस नई व्यवस्था को ‘अगली पीढ़ी का जीएसटी’ बताया जा रहा है. अधिकारियों का मानना है कि यह सुधार भारत के आर्थिक सुधारों में सबसे अहम होगा. कम टैक्स दरों से वस्तुओं की कीमत घटेगी, खपत बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी.

गरीब, किसान और एमएसएमई पर फोकस

नई व्यवस्था मध्यम वर्ग, गरीबों, किसानों और एमएसएमई को ध्यान में रखकर तैयार की गई है. आवश्यक वस्तुओं को कम कर स्लैब (5%) में रखा गया है, ताकि आम लोगों को सीधी राहत मिल सके.

विलासिता और नुकसानदेह वस्तुओं पर 40% टैक्स

प्रस्तावित बदलावों के तहत विलासिता एवं नुकसानदेह वस्तुओं पर 40% विशेष टैक्स लगाने का प्रस्ताव है. इससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, जबकि आम उपभोक्ता पर बोझ कम रहेगा.

दिवाली तक लागू हो सकता है नया प्रारूप

संशोधित जीएसटी प्रणाली दिवाली तक लागू हो सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐलान किया था कि दरों में कमी से छोटे एवं मझोले उद्योगों के साथ आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी.

बार-बार टैक्स दरों में बदलाव से मिलेगी राहत

नई प्रणाली का मकसद कर ढांचे को स्थिर बनाना है. इससे बार-बार दरों में बदलाव की ज़रूरत खत्म होगी और इनपुट टैक्स क्रेडिट का पैसा भी अटका नहीं रहेगा.

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अंतिम लक्ष्य: एकल कर स्लैब

अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल दो स्लैब रहेंगे, लेकिन भारत जब तक विकसित देश नहीं बनता, तब तक एकल स्लैब संभव नहीं है. हालांकि अंतिम लक्ष्य 2047 तक एक ही जीएसटी दर लागू करना है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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