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Home Business आम लोगों को ही जीएसटी का लाभ दिलाएगी सरकार, सीबीआईसी चेयरमैन का बड़ा बयान

आम लोगों को ही जीएसटी का लाभ दिलाएगी सरकार, सीबीआईसी चेयरमैन का बड़ा बयान

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आम लोगों को ही जीएसटी का लाभ दिलाएगी सरकार, सीबीआईसी चेयरमैन का बड़ा बयान
सीबीआईसी चेयरमैन संजय कुमार अग्रवाल.

GST Benefit: वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) की दरों में कटौती होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती इसका लाभ आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की है. सरकार ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि जीएसटी दरों में की गई कटौती का सीधा फायदा आम जनता को पहुंचना चाहिए. इसके लिए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन संजय कुमार अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा है कि मंत्रालय उपभोक्ता मामलों और अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर कीमतों की स्थिति पर पैनी नजर रख रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि दरों में कटौती का वास्तविक लाभ यदि ग्राहकों तक नहीं पहुंचता है, तो सरकार उद्योग संगठनों को जिम्मेदार ठहराएगी.

जीएसटी सुधार और कर संरचना का सरलीकरण

जीएसटी परिषद ने एक बड़ा कदम उठाते हुए चार स्लैब की जगह केवल दो स्लैब लागू करने का फैसला किया है. अब सामान्य वस्तुओं और सेवाओं पर 5% और 18% की दरें होंगी, जबकि सिगरेट और विलासिता की वस्तुओं जैसी अहितकर चीजों पर 40% का विशेष कर लागू होगा. इस सुधार का उद्देश्य एक तरह की वस्तु को एक ही कर श्रेणी में लाना है, ताकि भ्रम और विवाद कम हो सकें. पहले समान प्रकृति की वस्तुओं पर अलग-अलग दरें लागू होती थीं, जिससे उद्योगों को बार-बार नोटिस का सामना करना पड़ता था. नई व्यवस्था से यह समस्या लगभग समाप्त हो जाएगी और व्यवसायों के लिए कर प्रणाली अधिक सरल और पारदर्शी बन जाएगी.

उपभोक्ता वस्तुओं पर राहत और कंपनियों की जिम्मेदारी

दर कटौती का सबसे सीधा असर उपभोक्ता वस्तुओं पर पड़ने वाला है. टेलीविजन, एयर कंडीशनर, खानपान और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में कमी देखने को मिलेगी. अग्रवाल का कहना है कि सरकार लगातार यह देख रही है कि बाजार में वर्तमान कीमतें क्या हैं और सुधारों के बाद उनमें किस तरह का बदलाव आएगा. कंपनियों से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे लाभ का हस्तांतरण उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं. यदि कोई कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो प्रतिस्पर्धा की स्थिति में यह बात तुरंत सामने आ जाएगी, क्योंकि एक कंपनी लाभ देगी और दूसरी नहीं देगी तो उपभोक्ता तुरंत अंतर समझ जाएंगे.

बाजार में तत्काल प्रभाव और दीर्घकालीन सुधार

सीबीआईसी चेयरमैन ने यह भी स्पष्ट किया कि जो माल पहले से बाजार में उपलब्ध है, उसके एमआरपी को 10 से 15 दिनों के भीतर बदलना मुश्किल हो सकता है. लेकिन चूंकि सप्लाई चेन में लंबे समय तक माल नहीं टिकता, इसलिए नई खेप में यह बदलाव स्वतः लागू हो जाएगा. उदाहरण के लिए यदि कोई उपभोक्ता नया टीवी खरीदता है, तो उसे दर कटौती का लाभ तुरंत मिलेगा. वहीं छोटे सामानों पर कंपनियां डीलरों के माध्यम से खुदरा दुकानदारों को छूट प्रदान करेंगी, जिससे ग्राहकों तक फायदा पहुंच सके.

विवादों में कमी और प्रक्रियाओं की पारदर्शिता

जीएसटी सुधारों का एक और बड़ा फायदा यह है कि अब विवादों की संभावना बेहद कम हो जाएगी. नई व्यवस्था के तहत न केवल दरें कम और सरल होंगी, बल्कि पंजीकरण और रिफंड जैसी प्रक्रियाओं को भी तेज और आसान बना दिया गया है. इससे उद्योगों को निश्चितता मिलेगी और उन्हें भविष्य में किसी जटिलता का सामना नहीं करना पड़ेगा. सरकार का मानना है कि इन कदमों से व्यापार जगत में विश्वास बढ़ेगा और उपभोक्ताओं को भी अधिक पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिलेगा.

त्योहारी सीजन से पहले राहत की सौगात

नई दरें 22 सितंबर से प्रभावी होंगी, जो नवरात्रि का पहला दिन है और त्योहारी सीजन की शुरुआत मानी जाती है. अग्रवाल ने बताया कि ग्राहक दरों में कटौती की उम्मीद में खरीदारी टाल रहे थे और उद्योग जगत की ओर से भी मांग की जा रही थी कि सुधार जल्द लागू किए जाएं. इसलिए जीएसटी परिषद की बैठक तत्काल बुलाई गई और यह निर्णय लिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 15 अगस्त को अपने संबोधन में आश्वासन दिया था कि दिवाली और छठ पूजा से पहले जीएसटी सुधारों का लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा. यह कदम उसी वादे को पूरा करता है और त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आता है.

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उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता

जीएसटी सुधारों का यह दौर केवल कर संरचना को सरल बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य आम लोगों तक सीधा लाभ पहुंचाना है. सरकार चाहती है कि दरों में कटौती का फायदा उद्योगों की बजाय उपभोक्ताओं की जेब तक पहुंचे. कीमतों की निगरानी, प्रतिस्पर्धी बाजार और उद्योग संगठनों की जवाबदेही सुनिश्चित करके यह प्रयास किया जा रहा है कि हर उपभोक्ता को इस सुधार का वास्तविक लाभ मिले.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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