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Home Business आम जनता को बचाने के लिए सरकार ने छोड़े ₹14,000 करोड़ टैक्स; पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल-गैस सप्लाई पर बड़ा अपडेट

आम जनता को बचाने के लिए सरकार ने छोड़े ₹14,000 करोड़ टैक्स; पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल-गैस सप्लाई पर बड़ा अपडेट

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आम जनता को बचाने के लिए सरकार ने छोड़े ₹14,000 करोड़ टैक्स; पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल-गैस सप्लाई पर बड़ा अपडेट

Excise Duty Cut Petrol-Diesel: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) संकट के कारण आसमान छूती कच्चे तेल की कीमतों के बीच आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया था. पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव (Joint Secretary) सुजाता शर्मा ने सोमवार को बताया कि पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) घटाने की वजह से सरकार को करीब ₹14,000 करोड़ के टैक्स रेवेन्यू (राजस्व) का नुकसान उठाना पड़ा है.

याद दिला दें कि पश्चिम एशिया में तनाव के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े थे, जिसके बाद सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल दोनों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की थी.

संकट के बावजूद सप्लाई चेन मजबूत

संयुक्त सचिव ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय संकट का असर भारत के ईंधन आयात (Import) पर बड़े पैमाने पर पड़ा है. भारत अपनी जरूरत का.

  • 40% कच्चा तेल (Crude Oil)
  • 90% एलपीजी (रसोई गैस)
  • लगभग 65% प्राकृतिक गैस (Natural Gas)

उसी क्षेत्र से आयात करता है. सुजाता शर्मा ने भरोसा दिलाया कि इस भारी निर्भरता और संकट के बावजूद, देश के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई को बिना किसी रुकावट के चालू रखने के लिए हर संभव प्रयास किए गए हैं.

सरकार को वित्तीय नुकसान, तेल कंपनियों को अब भी घाटा

उन्होंने साफ किया कि सरकार द्वारा टैक्स में की गई इस कटौती की भारी वित्तीय कीमत चुकानी पड़ी है, जबकि दूसरी ओर सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अब भी नुकसान झेल रही हैं. हाल ही में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में की गई बढ़ोतरी के बावजूद, इन तेल कंपनियों को आज भी करीब ₹600 करोड़ प्रतिदिन का घाटा हो रहा है. राहत की बात यह है कि देश में ईंधन की कमी न हो, इसके लिए घरेलू स्तर पर एलपीजी का उत्पादन बढ़ाकर 50,000 टन प्रतिदिन तक पहुंचा दिया गया है.

कुछ राज्यों में ‘पैनिक बाइंग’ पर सरकार की नजर

गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश (UP) के कुछ जिलों में एलपीजी और पेट्रोल पंपों पर देखी जा रही भारी भीड़ और ‘पैनिक बाइंग’ (डर के मारे जरूरत से ज्यादा खरीदारी) की खबरों पर भी मंत्रालय ने स्थिति साफ की. सुजाता शर्मा ने कहा, “कुछ राज्यों में पैनिक बाइंग जैसी स्थिति दिख रही है, लेकिन इसका मुख्य कारण डर नहीं, बल्कि इस समय खेती-किसानी (Agricultural Demand) और थोक बाजार (Bulk Demand) में ईंधन की मांग का अचानक बढ़ जाना है.”

उन्होंने आगे कहा कि तेल कंपनियों के स्तर पर हर एक पेट्रोल पंप और रिटेल आउटलेट की बारीकी से निगरानी की जा रही है. अगर कहीं भी अस्थाई रूप से तेल खत्म (Dryout) होता है, तो उसे तुरंत ठीक किया जा रहा है. सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल का स्टॉक फिर से पूरा भर दिया गया है ताकि किल्लत न हो.

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