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Home Business लो, हट गया बैन! अब आसमानी छलांग मारेगा प्याज

लो, हट गया बैन! अब आसमानी छलांग मारेगा प्याज

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लो, हट गया बैन! अब आसमानी छलांग मारेगा प्याज

Onion Diplomacy: प्याज का विदेश में निर्यात करने वाले निर्यातकों और इसके उत्पादकों के लिए बहुत बड़ी राहत की खबर है. सरकार ने लोकसभा चुनावों के बीच शनिवार को इसके निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का फैसला किया है. हालांकि, सरकार ने इसके निर्यात पर से प्रतिबंध हटा दिया है, लेकिन इसके साथ में न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) की शर्त भी लगा रखी है. उसने प्याज के निर्यात पर 550 डॉलर प्रति टन एमईपी तय कर दिया है. हालांकि, इससे पहले सरकार ने प्याज के निर्यात पर 40 प्रतिशत शुल्क लगाने की भी घोषणा की थी. इसके एक दिन बाद ही उसने इसके निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का निर्णय किया है.

4 मई से ही हट गया प्रतिबंध

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, प्याज के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की ओर से शनिवार को एक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है. डीजीएफटी की अधिसूचना में कहा गया है कि प्याज की निर्यात नीति को संशोधित कर तत्काल प्रभाव से और अगले आदेश तक 550 डॉलर प्रति टन के एमईपी के तहत प्रतिबंध से मुक्त किया गया है.

3 मई को सरकार ने लगाया था निर्यात शुल्क

बताते चलें कि सरकार ने शुक्रवार की रात को ही प्याज के निर्यात पर 40 प्रतिशत शुल्क लगाया था. इससे पहले भारत ने पिछले साल अगस्त में 31 दिसंबर, 2023 तक प्याज पर 40 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाया था. सरकार ने आठ दिसंबर, 2023 को इस साल 31 मार्च तक प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. मार्च में निर्यात प्रतिबंध को अगले आदेश तक बढ़ा दिया गया था.

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प्याज का उत्पादन कम होने की उम्मीद

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने मार्च में प्याज उत्पादन के आंकड़े जारी किए थे. आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 (प्रथम अग्रिम अनुमान) में प्याज का उत्पादन पिछले साल के लगभग 302.08 लाख टन की तुलना में लगभग 254.73 लाख टन होने की उम्मीद है. आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में 34.31 लाख टन, कर्नाटक में 9.95 लाख टन, आंध्र प्रदेश में 3.54 लाख टन और राजस्थान में 3.12 लाख टन उत्पादन घटा है. महाराष्ट्र के किसानों ने निर्यात प्रतिबंध का विरोध किया था. कांग्रेस ने पिछले महीने नरेन्द्र मोदी सरकार पर प्याज निर्यात पर प्रतिबंध के कारण महाराष्ट्र के किसानों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया था.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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