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Home Business सोना-चांदी से पाम ऑयल तक, सरकार ने बदली टैरिफ वैल्यू 

सोना-चांदी से पाम ऑयल तक, सरकार ने बदली टैरिफ वैल्यू 

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सोना-चांदी से पाम ऑयल तक, सरकार ने बदली टैरिफ वैल्यू 
Gold Silver Tariff Value (Photo: Freepik)

Gold Silver Tariff Value: भारत सरकार ने सोना, चांदी और खाने के तेल के इंपोर्ट को लेकर बड़ा अपडेट दिया है. सरकार के तहत काम करने वाले सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) ने इन जरूरी चीजों की नई टैरिफ वैल्यू तय की है. आसान भाषा में समझें तो अब इन सामानों पर इंपोर्ट ड्यूटी की गणना नए रेट के हिसाब से होगी. यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश पर बढ़ते इंपोर्ट खर्च और रुपये की कमजोरी का दबाव साफ दिख रहा है. 

आखिर क्या बदला है?

नए बदलाव के मुताबिक, सोने की टैरिफ वैल्यू 1,508 डॉलर प्रति 10 ग्राम तय की गई है. वहीं चांदी की टैरिफ वैल्यू 2,810 डॉलर प्रति किलोग्राम कर दी गई है. खाने के तेल की बात करें तो क्रूड पाम ऑयल की वैल्यू 1,205 डॉलर प्रति मीट्रिक टन और क्रूड सोयाबीन ऑयल की वैल्यू 1,256 डॉलर प्रति मीट्रिक टन रखी गई है. सरकार समय-समय पर इन वैल्यू को बदलती रहती है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव के हिसाब से इंपोर्ट ड्यूटी तय की जा सके. 

सरकार ने ऐसा कदम क्यों उठाया?

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह है देश का बढ़ता इंपोर्ट बिल. अभी पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारत पर भी पड़ रहा है. भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना और कच्चा तेल इंपोर्ट करने वाले देशों में शामिल है. ऐसे में जब इंटरनेशनल मार्केट में कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत का इंपोर्ट खर्च भी बढ़ जाता है. इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है और रुपये की कीमत कमजोर हो सकती है. इसी खतरे को देखते हुए सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है. 

सोना-चांदी पर पहले क्या हुआ था?

कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी में बड़ा इजाफा किया था. सरकार ने इन पर लगने वाली ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी थी. इसका मकसद साफ था कि गैर-जरूरी इंपोर्ट को कम करना और विदेशी मुद्रा की बचत करना. अब टैरिफ वैल्यू बढ़ने के बाद इंपोर्टर्स की लागत पर असर पड़ सकता है, जिसका असर घरेलू बाजार में कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है. 

आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

अगर आप सोना खरीदने की सोच रहे हैं या खाने के तेल की कीमतों पर नजर रखते हैं, तो यह फैसला आपके लिए अहम है. सोने और चांदी की ऊंची इंपोर्ट लागत से बाजार भाव बढ़ सकते हैं. वहीं खाने के तेल के दामों पर भी दबाव बन सकता है.

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