Gold Import Rules India: भारत सरकार के विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने सोने के इम्पोर्ट को लेकर नियमों को काफी सख्त कर दिया है. गुरुवार (14 मई) को जारी एक नोटिफिकेशन में सरकार ने साफ किया कि अब ‘एडवांस ऑथराइजेशन’ (AA) स्कीम के तहत सोने के इंपोर्ट पर लगाम कसी जाएगी. यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के कुछ ही दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से सोने की खरीद कम करने और पैसे को बेहतर कामों में इन्वेस्ट करने को कहा था.
क्या है नया नियम और इसकी लिमिट?
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक एक्सपोर्टर्स इस स्कीम के तहत कच्चा माल (सोना) बिना कस्टम ड्यूटी दिए मंगाते थे ताकि उससे गहने बनाकर विदेश भेज सकें. लेकिन अब सरकार ने इसकी सीमा तय कर दी है. अब एक बार की अनुमति (Authorisation) पर अधिकतम 100 किलोग्राम सोना ही मंगाया जा सकेगा. सरकार का मकसद सोने के बढ़ते इंपोर्ट पर काबू पाना और देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को कम करना है.
नए खिलाड़ियों के लिए क्या शर्तें हैं?
अगर कोई कंपनी या व्यक्ति पहली बार इस स्कीम के तहत सोने के इंपोर्ट के लिए आवेदन करता है, तो उसे कड़ी जांच से गुजरना होगा. अब क्षेत्रीय अधिकारी (Regional Authority) खुद उस फैक्ट्री का दौरा करेंगे. वे देखेंगे कि क्या वहां वाकई गहने बनाने की मशीनें और क्षमता मौजूद है या नहीं. बिना फिजिकल वेरिफिकेशन के अब नए आवेदकों को मंजूरी नहीं मिलेगी.
क्या पिछला काम पूरा करना जरूरी है?
जी हां, सरकार ने अब परफॉर्मेंस को इम्पोर्ट से जोड़ दिया है. नया नियम कहता है कि अगर आपको दूसरी बार सोना मंगाना है, तो पहले वाले लाइसेंस का कम से कम 50% एक्सपोर्ट टारगेट पूरा करना होगा. यानी, जब तक आप आधे गहने बनाकर विदेश नहीं भेज देते, तब तक आपको दोबारा सोना मंगाने की इजाजत नहीं मिलेगी. इससे यह सुनिश्चित होगा कि सोना सिर्फ तिजोरियों में रखने के लिए नहीं, बल्कि व्यापार के लिए मंगाया जा रहा है.
निगरानी कैसे रखी जाएगी?
भ्रष्टाचार और गड़बड़ी को रोकने के लिए अब हर 15 दिन में (Fortnightly) रिपोर्ट देनी होगी. इस रिपोर्ट को एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से प्रमाणित करवाना अनिवार्य होगा. इसमें इंपोर्ट किए गए सोने और उससे बने गहनों के एक्सपोर्ट का पूरा हिसाब होगा. क्षेत्रीय अधिकारी ये सारी रिपोर्ट दिल्ली स्थित DGFT मुख्यालय भेजेंगे ताकि केंद्र सरकार हर महीने सोने की एक-एक ग्राम का हिसाब रख सके.
भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा खरीदार है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है. इन नए 5 नियमों (SIONs M-1 से M-8) के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब नियम तोड़ने वालों और कागजी कंपनियों के लिए कोई जगह नहीं है.
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