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Gas Supply Decline: गैस की सप्लाई में आई गिरावट, जानें क्या हैं बड़े कारण?

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Gas Supply Decline: गैस की सप्लाई में आई गिरावट, जानें क्या हैं बड़े कारण?
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अप्रैल से अक्टूबर महीने के बीच गैस की आपूर्ति में गिरावट दर्ज.

Gas Supply Decline: चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्टूबर के दौरान भारत में प्राकृतिक गैस की खपत औसतन करीब 190 एमएमएससीएमडी (मिलियन मेट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन) रही, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के लगभग 200 एमएमएससीएमडी के मुकाबले 4.6% कम है. गैस की मांग में यह गिरावट कई कारकों के मिश्रित प्रभाव का नतीजा है. इसमें बिजली उत्पादन का सामान्य होना, रिफाइनिंग और उर्वरक इकाइयों में नियोजित मेंटेनेंस शटडाउन और एलएनजी कीमतों में मौसमी उतार-चढ़ाव शामिल हैं.

बिजली क्षेत्र से घटी मांग

क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, गर्मियों के दौरान गैस की खपत में तेज गिरावट देखी गई. इसकी एक बड़ी वजह दक्षिण-पश्चिम मानसून का अपेक्षा से जल्दी आना रहा, जिससे कूलिंग की मांग कम हो गई. नतीजतन, गैस-आधारित बिजली संयंत्रों से खपत घट गई. यह स्थिति पिछले वित्त वर्ष की गर्मियों से बिल्कुल अलग रही, जब गैस की खपत करीब 203 एमएमएससीएमडी तक पहुंच गई थी. उस समय नीति-संचालित उपायों के चलते गैस-आधारित पावर प्लांट्स का डिस्पैच बढ़ा था.

इसके अलावा, स्पॉट एलएनजी की औसत कीमतें इस अवधि में करीब 13 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू रहीं, जो साल-दर-साल आधार पर लगभग 34% अधिक थीं. ऊंची कीमतों के चलते गैस-आधारित बिजली उत्पादन मेरिट ऑर्डर से बाहर हो गया और अतिरिक्त मांग सीमित रह गई.

मानसून में स्थिरता, लेकिन रिकवरी सीमित

रिपोर्ट के अनुसार, मानसून के दौरान गैस की मांग में कुछ हद तक स्थिरता देखने को मिली. स्पॉट एलएनजी कीमतों में करीब 9% की गिरावट और रिफाइनरी और उर्वरक इकाइयों में ऑपरेशन दोबारा शुरू होने से खपत गर्मियों के मुकाबले 1.2% बढ़कर लगभग 191 एमएमएससीएमडी हो गई. उर्वरक संयंत्रों को बंद होने से बचाने के लिए किए गए नीतिगत हस्तक्षेपों ने आधार मांग को सहारा दिया. हालांकि, बिजली क्षेत्र से खपत कमजोर ही बनी रही.

सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन बना सहारा

क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां कुल गैस मांग दबाव में रही, वहीं सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) सेगमेंट ने मजबूती दिखाई. सीजीडी की खपत साल-दर-साल आधार पर 8.8% बढ़कर करीब 44 एमएमएससीएमडी पहुंच गई. इसके चलते कुल गैस मांग में सीजीडी की हिस्सेदारी पिछले साल के करीब 20% से बढ़कर लगभग 23% हो गई. इस मजबूती के पीछे बुनियादी ढांचे का निरंतर विस्तार अहम रहा. अक्टूबर तक देश में 8,477 सीएनजी स्टेशन और 15.9 मिलियन घरेलू पीएनजी कनेक्शन हो चुके हैं. केवल इस वित्त वर्ष में अब तक 361 नए सीएनजी स्टेशन और 0.9 मिलियन घरेलू कनेक्शन जोड़े गए हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट और घरेलू मांग को स्थायी सपोर्ट मिला.

नेटवर्क विस्तार और सप्लाई-साइड बदलाव

सीजीडी नेटवर्क का विस्तार अब महानगरों से आगे बढ़कर टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुंच चुका है. इससे डिमांड का बेस और ज्यादा संतुलित हुआ है. साथ ही, सप्लाई-साइड बदलाव के चलते सीजीडी को मिलने वाली एपीएम गैस का हिस्सा घटकर 35-40% रह गया है, जबकि पहले यह 55-65% था. इसके कारण नई कुएं की गैस, एचपीएचटी गैस और आर-एलएनजी पर निर्भरता बढ़ी है और आयात पर निर्भरता 32% से बढ़कर 36% हो गई है. हालांकि, संतुलित प्राइस पास-थ्रू के चलते वॉल्यूम पर बड़ा असर नहीं पड़ा.

पाइपलाइन टैरिफ सुधार से सीजीडी को फायदा

पीएनजीआरबी द्वारा अधिसूचित नया दो-जोन पाइपलाइन टैरिफ फ्रेमवर्क सीजीडी विस्तार के लिए अहम साबित हो सकता है. यह जो 1 जनवरी 2026 से लागू होगा. यूनिफॉर्म सीजीडी टैरिफ से दूर-दराज के इलाकों में ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट करीब 50% तक घटेगी, जिससे गैस की अफोर्डेबिलिटी बढ़ेगी और वॉल्यूम ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा.

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गैस की मांग बढ़ने की उम्मीद

आने वाले समय में गैस की कुल मांग के रेंजबाउंड रहने की उम्मीद है, लेकिन सीजीडी सेगमेंट स्थिरता का प्रमुख स्तंभ बना रहेगा. पॉलिसी सपोर्ट, बेहतर प्राइसिंग सिग्नल और नेटवर्क विस्तार मिलकर भारत की गैस डिमांड में धीरे-धीरे व्यापक रिकवरी की नींव रख सकते हैं.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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