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Home Business अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती से FPI ने भारतीय शेयर बेचे, निवेशकों की चिंता बढ़ी

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती से FPI ने भारतीय शेयर बेचे, निवेशकों की चिंता बढ़ी

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अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती से FPI ने भारतीय शेयर बेचे, निवेशकों की चिंता बढ़ी
Share Market

Share Market: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने फरवरी 2025 में भारतीय शेयर बाजारों से 34,574 करोड़ रुपये की निकासी की है. इससे पहले जनवरी में उन्होंने 78,027 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे. इस तरह, साल 2025 के पहले दो महीनों में एफपीआई (FPI) की कुल निकासी 1.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.

FPI निकासी के कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में ऊंचे मूल्यांकन और कॉरपोरेट आय में अनिश्चितता के चलते एफपीआई (FPI) लगातार निकासी कर रहे हैं. वॉटरफील्ड एडवाइजर्स के वरिष्ठ निदेशक विपुल भोवर का मानना है कि बाजार में बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि, डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता है.

इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनियों के कमजोर नतीजे और उपभोक्ता खर्च में गिरावट ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जिंसों की कीमतों में कमी के कारण भी यह स्थिति और जटिल हो गई है.

चीन की ओर बढ़ रहा निवेश

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने बताया कि भारतीय बाजार में ऊंचे मूल्यांकन के चलते  एफपीआई (FPI) चीन के शेयर बाजार की ओर रुख कर रहे हैं, जहां मूल्यांकन अपेक्षाकृत (Relatively) कम है. हालांकि, इस प्रक्रिया में वे कुछ बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में भी बिकवाली कर रहे हैं.

वित्तीय और बॉन्ड बाजार पर असर

एफपीआई (FPI)  की निकासी का सबसे अधिक प्रभाव वित्तीय सेवाओं पर पड़ा है. दिलचस्प बात यह है कि यह क्षेत्र अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, फिर भी इसमें भारी बिकवाली हो रही है. इसके अतिरिक्त, एफपीआई ने बॉन्ड बाजार से भी 8,932 करोड़ रुपये और स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग के तहत 2,666 करोड़ रुपये निकाले हैं.

पिछले वर्षों में एफपीआई का निवेश

साल 2024 में एफपीआई का भारतीय बाजार में कुल निवेश 427 करोड़ रुपये था, जो अपेक्षाकृत कम रहा. इसके विपरीत, 2023 में उन्होंने 1.71 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था. वहीं, 2022 में वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण 1.21 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई थी.

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Disclaimer: शेयर बाजार से संबंधित किसी भी खरीद-बिक्री के लिए प्रभात खबर कोई सुझाव नहीं देता. हम बाजार से जुड़े विश्लेषण मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकिंग कंपनियों के हवाले से प्रकाशित करते हैं. लेकिन प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही बाजार से जुड़े निर्णय करें.

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अभिषेक पाण्डेय पिछले 4 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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