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Home Business विजन आईएएस पर सीसीपीए ने लगाया 3 लाख का जुर्माना, जानें क्यों?

विजन आईएएस पर सीसीपीए ने लगाया 3 लाख का जुर्माना, जानें क्यों?

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विजन आईएएस पर सीसीपीए ने लगाया 3 लाख का जुर्माना, जानें क्यों?
सीसीपीए ने विजन आईएएस पर जुर्माना लगाया.

Fine: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की आईएएस के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले कोचिंग संस्थान पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. प्राधिकरण ने पाया कि विजन आईएएस ने अपने छात्रों की सफलता दर को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के लिए पाठ्यक्रम संबंधी आवश्यक जानकारी छिपाई. उन्होंने अपने विज्ञापनों में यह दावा किया कि उनके सभी टॉपर्स ने फाउंडेशन कोर्स से सफलता प्राप्त की है, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं था.

सीसीपीए ने पाया भ्रामक विज्ञापन का मामला

सीसीपीए की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि विजन आईएएस ने जानबूझकर उन छात्रों के विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी नहीं दी, जिन्होंने यूपीएसी में सफलता प्राप्त की. केवल पहले स्थान पर आए छात्र का फाउंडेशन कोर्स दिखाया गया, जबकि बाकी नौ सफल अभ्यर्थियों में से केवल एक ने फाउंडेशन कोर्स लिया था. बाकी छात्रों में से छह ने केवल परीक्षा सीरीज (प्रीलिम्स और मेन्स) का विकल्प चुना, जबकि दो छात्रों ने अभ्यास परीक्षाओं का इस्तेमाल किया.

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सीसीपीए ने यूजर्स को दी चेतावनी

सीसीपीए के बयान में कहा गया है कि इस प्रकार के भ्रामक विज्ञापन छात्रों और अभिभावकों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं. इससे उनकी समय और पैसे की बर्बादी हो सकती है. विजन आईएएस जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को पारदर्शिता और सटीक जानकारी प्रदान करनी चाहिए, ताकि छात्र सही निर्णय ले सकें. विजन आईएएस अपने पाठ्यक्रमों और अध्ययन सामग्री के माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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