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Home Business साइबर ठगों की अब खैर नहीं, डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ आ गया तगड़ा हथियार

साइबर ठगों की अब खैर नहीं, डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ आ गया तगड़ा हथियार

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साइबर ठगों की अब खैर नहीं, डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ आ गया तगड़ा हथियार
Bihar News (सांकेतिक)

Cyber Fraud: साइबर धोखाधड़ी के जरिए लोगों के खातों से पैसा उड़ाने वाले साइबर ठगों की अब खैर नहीं है. सरकार ने बुधवार को उनकी इन गतिविधियों पर सख्त नजर बनाए रखने और उनकी धर-पकड़ करने के लिए एक तगड़ा हथियार लॉन्च कर दिया है. खबर है कि दूरसंचार विभाग ने वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए ‘फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (एफआरआई)’ लॉन्च किया है. यह टूल बैंकों, यूपीआई सर्विस प्रोवाइडर्स और वित्तीय संस्थानों के साथ खुफिया जानकारी साझा कर साइबर अपराध को रोकने में मदद करेगा.

संदिग्ध नंबरों पर सख्त नजर

एफआरआई टूल किसी मोबाइल नंबर को धोखाधड़ी के लिए संदिग्ध पाए जाने पर उसे आईडेंटिफाई करता है. ऐसे नंबर से डिजिटल पेमेंट के प्रयास पर सिस्टम अतिरिक्त सुरक्षा जांच और वेरिफिकेशन लागू करती है.

त्वरित और सहयोगात्मक कार्रवाई

एफआरआई दूरसंचार और वित्तीय क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ तेजी से लक्षित कार्रवाई को सक्षम बनाता है. यह डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) के मल्टी-डाइमेंशन एनालिसिस पर आधारित है.

जोखिम का स्तर होगा साफ

यह टूल मोबाइल नंबरों को ‘मीडियम’, ‘हाई’ या ‘हाइएस्ट’ जोखिम के रूप में वर्गीकृत करता है. यह वर्गीकरण राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, चक्षु मंच और वित्तीय संस्थानों से मिली जानकारी पर आधारित है.

बैंकों और यूपीआई को मिलेगी ताकत

एफआरआई बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और यूपीआई सेवा प्रदाताओं को उच्च जोखिम वाले नंबरों के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने में सशक्त बनाता है.

समय पर कार्रवाई, धोखाधड़ी पर प्रहार

साइबर धोखाधड़ी में शामिल नंबर अक्सर कुछ दिनों तक ही सक्रिय रहते हैं. एफआरआई का अग्रिम जोखिम संकेतक त्वरित कार्रवाई में मदद करता है, जिससे पूर्ण सत्यापन में लगने वाला समय कम प्रभावी होता है.

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फोनपे ने दिखाई राह

डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म फोनपे ने एफआरआई को अपनाकर हाइएस्ट रिस्क वाले नंबरों से लेनदेन को नकारना शुरू कर दिया है. इससे साइबर सुरक्षा में एक नया मानक स्थापित हो रहा है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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