[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Business सैलरी आते ही हो जाती है छूमंतर? अपनाएं ये ‘जादुई फॉर्मूला’, EMI और खर्चों की टेंशन होगी खत्म!

सैलरी आते ही हो जाती है छूमंतर? अपनाएं ये ‘जादुई फॉर्मूला’, EMI और खर्चों की टेंशन होगी खत्म!

0
सैलरी आते ही हो जाती है छूमंतर? अपनाएं ये ‘जादुई फॉर्मूला’, EMI और खर्चों की टेंशन होगी खत्म!
सांकेतिक तस्वीर (फोटो : Canva)

Financial Planning : अक्सर महीने की 1 तारीख को जब मोबाइल पर ‘Salary Credited’ का मैसेज आता है, तो चेहरे पर मुस्कान होती है. लेकिन 10 तारीख आते-आते किराया, बिजली बिल, बच्चों की स्कूल फीस और पुरानी EMI उस मुस्कान को चिंता में बदल देती हैं.

अगर आपके साथ भी ऐसा होता है कि ‘पैसा आता तो है, पर जाता कहां है पता नहीं चलता’, तो यकीन मानिए आप अकेले नहीं हैं. फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स एक बहुत ही आसान तरीका बताते हैं जिसे 50-30-20 का फॉर्मूला कहते हैं. यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बल्कि आपकी जेब को खुश रखने का एक देसी नुस्खा है. आइए समझते हैं इसे आसान भाषा में.

क्या है यह 50-30-20 का गणित ?

अपनी कुल इन-हैंड सैलरी (टैक्स कटने के बाद जो हाथ में आए) को तीन लिफाफों में बांट लीजिए:

  • 50% ‘मजबूरी’ (Needs): आपकी सैलरी का आधा हिस्सा उन चीजों पर जाना चाहिए जिनके बिना गुजारा मुमकिन नहीं है. जैसे- घर का राशन, किराया, पानी-बिजली का बिल और जरूरी EMI.
  • 30% ‘मस्ती’ (Wants): यह हिस्सा आपके शौक के लिए है. बाहर डिनर पर जाना, नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन, नई शर्ट या वेकेशन. जीना भी तो जरूरी है!
  • 20% मजबूती’ (Savings & Investment): यह आपके भविष्य की तिजोरी है. इसमें से पैसा SIP, पीपीएफ या इमरजेंसी फंड में जाना चाहिए.

किराए और EMI का ‘लोचा’ कैसे सुलझाएं ?

सबसे ज्यादा सिरदर्द किराया और बैंक की किस्तें (EMI) ही देती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि

  • किराया: आपकी सैलरी के 25-30% से ज्यादा नहीं होना चाहिए. अगर आप 50,000 कमाते हैं, तो 15,000 से ऊपर का घर आपकी बचत को ‘खा’ जाएगा.
  • EMI: सभी लोन की किस्तें मिलाकर आपकी आय का 30-40% पार नहीं करनी चाहिए. अगर इससे ज्यादा जा रहा है, तो समझ लीजिए आप कर्ज के जाल में फंस रहे हैं.

SIP: छोटे निवेश का बड़ा धमाका

आजकल लोग SIP (Systematic Investment Plan) की बात बहुत करते हैं, और क्यों न करें? अगर आप 25 साल की उम्र से सिर्फ 5,000 रुपये महीना बचाकर सही जगह निवेश करते हैं, तो रिटायरमेंट तक आप करोड़ों के मालिक हो सकते हैं. यह कंपाउंडिंग की ताकत है. यानी आपके पैसे पर मिलने वाले ब्याज पर भी ब्याज.

मुश्किल वक्त के लिए इमरजेंसी फंड

जैसे बारिश से बचने के लिए छतरी चाहिए, वैसे ही लाइफ की अनहोनी के लिए हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस जरूरी है. साथ ही, अपने पास कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर पैसा अलग से रखें (इमरजेंसी फंड), ताकि नौकरी जाने या किसी इमरजेंसी में आपको किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े.

Also Read : सरकारी कर्मचारियों और मजदूरों की बढ़ी न्यूनतम मजदूरी, जानें अब हर दिन कितने रुपये मिलेंगे

Disclaimer: शेयर बाजार से संबंधित किसी भी खरीद-बिक्री के लिए प्रभात खबर कोई सुझाव नहीं देता. हम बाजार से जुड़े विश्लेषण मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकिंग कंपनियों के हवाले से प्रकाशित करते हैं. लेकिन प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही बाजार से जुड़े निर्णय करें.

Previous article PURNIA : स्कूल से मोटर चोरी का प्रयास
Next article Samastipur News: दोस्त की शादी से लौट रहे युवकों को बस ने कुचला, दो की मौत, एक की हालत गंभीर
Avatar Of Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 4 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel