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Home Business धड़ाधड़ बिक रहा FASTag Annual Pass, 4 दिन में 5 लाख के पार पहुंची यूजर्स की संख्या

धड़ाधड़ बिक रहा FASTag Annual Pass, 4 दिन में 5 लाख के पार पहुंची यूजर्स की संख्या

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धड़ाधड़ बिक रहा FASTag Annual Pass, 4 दिन में 5 लाख के पार पहुंची यूजर्स की संख्या
FASTag Annual Pass

FASTag Annual Pass: देशभर में फास्टैग सालाना पास सुविधा को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है. इस योजना की शुरुआत 15 अगस्त को की गई थी और सिर्फ चार दिन के भीतर ही इसके पांच लाख से ज्यादा यूजर्स जुड़ चुके हैं. यह आंकड़ा बताता है कि टोल भुगतान को लेकर लोगों में इस नई सुविधा को लेकर काफी उत्साह है.

सालाना पास की सुविधा और लागत

फास्टैग सालाना पास राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर लागू है. यह सुविधा लगभग 1,150 टोल बूथ पर उपलब्ध है. पास खरीदने वाले यूजर्स 3,000 रुपये का एकमुश्त भुगतान कर सकते हैं, जिसके बाद उन्हें एक साल में 200 टोल प्लाजा पार करने की सुविधा मिलती है. इस प्रकार, यह योजना यात्रियों को बार-बार भुगतान की झंझट से बचाती है.

राज्यों में सबसे अधिक मांग

सरकार की ओर से जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फास्टैग सालाना पास खरीद में तमिलनाडु सबसे आगे रहा है. इसके बाद कर्नाटक और हरियाणा का स्थान है. वहीं, लेनदेन के लिहाज से भी तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के टोल प्लाजा सबसे सक्रिय रहे. यह दर्शाता है कि दक्षिण भारत के राज्यों में इस योजना की मांग अधिक है.

कहां से खरीद सकते हैं सालाना पास

फास्टैग सालाना पास सभी वैध फास्टैग वाले गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए मान्य है. भुगतान करने के सिर्फ दो घंटे बाद ही यह सक्रिय हो जाता है. यूजर्स इसे राजमार्गयात्रा ऐप या एनएचएआई की आधिकारिक वेबसाइट से खरीद सकते हैं.

यूजर्स के लिए फायदेमंद

फास्टैग सालाना पास से यात्रियों को समय और पैसे दोनों की बचत होगी. यह न केवल टोल प्लाजा पर लंबी कतारों से छुटकारा दिलाएगा, बल्कि कैशलेस यात्रा को भी बढ़ावा देगा. साथ ही, यह योजना बार-बार यात्रा करने वाले लोगों के लिए बेहद किफायती साबित हो रही है.

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तेजी से अपना रहे स्मार्ट टोल सिस्टम

फास्टैग सालाना पास की शुरुआती सफलता यह दिखाती है कि भारत में डिजिटल भुगतान और स्मार्ट टोल सिस्टम को लोग तेजी से अपना रहे हैं. आने वाले दिनों में उपयोगकर्ताओं की संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग प्रबंधन को भी लाभ होगा.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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