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Home Business किसानों को भी भरना चाहिए आयकर रिटर्न या नहीं, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

किसानों को भी भरना चाहिए आयकर रिटर्न या नहीं, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

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किसानों को भी भरना चाहिए आयकर रिटर्न या नहीं, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
Muzaffarpur News :

IT Return: अगर आप देश के किसान हैं और आपके आमदनी का स्रोत केवल खेती-बाड़ी ही है, तो क्या आप आयकर के दायरे में आते हैं? क्या आपको आयकर रिटर्न (आईटी रिटर्न) दाखिल करना चाहिए या नहीं? वहीं, अगर आप खेती-बाड़ी के साथ-साथ कोई बिजनेस चलाते हैं या घर किराए पर चढ़ा रखा है, तो क्या आपकी इस आमदनी पर टैक्स लगेगा या नहीं? ये सभी सवाल का जवाब जानना बेहद जरूरी है. किसानों को आयकर रिटर्न भरने को लेकर हमने अपने एक्सपर्ट से बातचीत की है. आइए, जानते हैं कि किसानों को आयकर रिटर्न दाखिल करने को लेकर हमारे एक्सपर्ट क्या कहते हैं.

किसानों को कब नहीं भरना पड़ेगा आयकर रिटर्न

प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ बातचीत में चार्टर्ड अकाउंटेंट आरके कौशल ने कहा कि यदि देश के किसानों के पास खेती-बाड़ी के अलावा आमदनी का दूसरा और कोई साधन नहीं है, तो उन्हें आयकर रिटर्न दाखिल करना जरूरी नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर उनकी और कोई इनकम है, तो आयकर रिटर्न भरना जरूरी है. और कोई इनकम में एफडीआर है, फिक्स्ड डिपोजिट है, कोई बिजनेस करते हैं या फिर आपका ट्रैक्टर भाड़ा में चलता है. ये सभी खेती-बाड़ी के अलावा दूसरे और इनकम की श्रेणी में आते हैं.

केवल खेती-बाड़ी से होने वाली आमदनी आयकर से बाहर

उन्होंने कहा कि किसानों के लिए केवल खेती-बाड़ी से होने वाली आमदनी पर ही छूट है, लेकिन अन्य स्रोतों से होने वाली आमदनी आयकर के दायरे में आ जाती है. उन्होंने कहा कि अगर खेती-बाड़ी से ही आमदनी अच्छी हो, तब भी उस पर टैक्स नहीं लगेगा. अगर दूसरे स्रोत से इनकम है, तो अन्य स्रोत से होने वाली आमदनी और खेती-बाड़ी से होने वाली आमदनी पर भी टैक्स लगेगा.

किन परिस्थितियों में किसानों को दाखिल करना होगा रिटर्न

चार्टर्ड अकाउंटेंट विनोद बंका ने भी कहा कि एग्रीकल्चरल इनकम टैक्सेबल नहीं है. वहीं, अगर वे कोई बिजनेस करते हैं, तो वह टैक्सेबल है. उन्होंने कहा कि हम लोगों का इनकम टैक्सेबल इनकम सेक्शन-5 में पांच सेट में है. इसमें इनकम फ्रॉम सैलरी, इनकम फ्रॉम बिजनेस, इनकम फ्रॉम कैपिटल गेन, इनकम फ्रॉम हाउस प्रोपर्टी या फिर अन्य स्रोतों से आमदनी शामिल है. अगर किसानों की आमदनी इनमें से किसी भी सेट में आती है, तो उसे आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा.

ऐसे समझें टैक्स का फंडा

विनोद बंका ने आगे कहा कि मिनिमम टैक्सेबल लिमिट 2.5 लाख का है. इस पर टैक्स नहीं लगता है. अगर इससे अधिक की भी आमदनी है, तो पांच लाख रुपये तक पर छूट मिलती है. पांच लाख रुपये तक की आमदनी में करीब 12,500 रुपये तक की छूट मिलती है. उन्होंने कहा कि 2.5 लाख रुपये से अधिक टैक्सेबल इनकम भी है, तो किसानों को रिटर्न दाखिल करने की जरूरत नहीं है. वहीं, एग्रीकल्चर से जुड़े किसी कारोबार से इनकम है, तो रेट पर्पस से खेती-बाड़ी से होने वाली आमदनी को अन्य स्रोतों से होने वाली आमदनी में जोड़ दिया जाता है और फिर उसे माइनस कर दिया जाता है.

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क्या है रेट पर्पस

रेट पर्पस का मतलब हुआ कि मान लीजिए वह वैसे 10 पर्सेंट के टैक्सेबल इनकम में आ रहा है और खेती-बाड़ी से उसकी 10 लाख रुपये की आमदनी है, तो वह 30 पर्सेंट के स्लैब में चला जाएगा. तो फिर उसकी पूरी आमदनी पर 30 पर्सेंट का टैक्स लगेगा और फिर खेती-बाड़ी से होने वाली आमदनी पर 30 पर्सेंट की छूट मिल जाएगी. इसका मतलब यह हुआ कि उसको कुछ टैक्स देना होगा. वहीं, केवल खेती-बाड़ी से होने वाली आमदनी पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगेगा.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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