Export Duty on Petrol Diesel: केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से लागू होने वाले अगले 15 दिनों के लिए पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात (एक्सपोर्ट) पर लगने वाली ड्यूटी में बदलाव किया है. इसके साथ ही सरकार ने सरकारी तेल विपणन कंपनियों (PSU Oil Marketing Companies) को मॉरीशस और मालदीव को होने वाले पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट पर भी बड़ी राहत दी है. यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब सरकार लगातार ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों और इंटरनेशनल मार्केट की स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
कितनी हुई नई एक्सपोर्ट ड्यूटी?
सरकार ने 1 जुलाई से अगले पखवाड़े (15 दिन) के लिए नई एक्सपोर्ट ड्यूटी तय कर दी है.
| उत्पाद | नई एक्सपोर्ट ड्यूटी |
| पेट्रोल | ₹4 प्रति लीटर |
| डीजल | ₹8.5 प्रति लीटर |
| एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) | ₹7.5 प्रति लीटर |
सरकार हर 15 दिन में इन दरों की समीक्षा करेगी. यह फैसला इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कीमतों को देखते हुए लिया जाता है.
किन देशों को मिली बड़ी राहत?
इस बार सरकार ने एक अहम बदलाव करते हुए मॉरीशस और मालदीव को भी एक्सपोर्ट ड्यूटी से छूट देने का फैसला किया है. हालांकि यह छूट सिर्फ सरकारी तेल विपणन कंपनियों (PSU OMCs) द्वारा किए जाने वाले एक्सपोर्ट पर लागू होगी.
अब इन 6 देशों को सरकारी कंपनियों के जरिए होने वाले एक्सपोर्ट पर एक्सपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी.
- नेपाल
- भूटान
- बांग्लादेश
- श्रीलंका
- मॉरीशस
- मालदीव
पहले यह छूट केवल नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका तक सीमित थी.
क्या आम लोगों पर पड़ेगा कोई असर?
फिलहाल नहीं. सरकार ने घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया है. इसका मतलब है कि इस फैसले का सीधा असर देश में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स या रिटेल फ्यूल कर पर नहीं पड़ेगा. हालांकि, भविष्य में ग्लोबल तेल कीमतों में बड़े बदलाव होने पर सरकार स्थिति की समीक्षा करती रहेगी.
सरकार बार-बार समीक्षा क्यों करती है?
सरकार एक्सपोर्ट ड्यूटी की समीक्षा हर 15 दिन में करती है ताकि इंटरनेशनल मार्केट की बदलती परिस्थितियों के हिसाब से फैसला लिया जा सके. इससे एक तरफ एक्सपोर्ट के अवसर बने रहते हैं, वहीं दूसरी ओर देश में फ्यूल की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाती है.
मार्च में पश्चिम एशिया में बढ़े जियोपॉलिटिकल तनाव के बाद भारत ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट पर नियंत्रण संबंधी कदम उठाए थे. उस समय ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी. इन उपायों का मकसद घरेलू बाजार में फ्यूल की उपलब्धता बनाए रखना और संभावित आपूर्ति संकट से देश को सुरक्षित रखना था.
अब भी सरकार इसी नीति के तहत इंटरनेशनल तेल बाजार पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव करती रहेगी. वहीं, मॉरीशस और मालदीव को मिली नई छूट से सरकारी तेल कंपनियों के लिए इन रणनीतिक साझेदार देशों को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की आपूर्ति करना पहले की तुलना में आसान होगा.
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