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Home Business तीन दिन में 50% दावे निपटाकर छाया EPFO, सर्विस में आई रफ्तार

तीन दिन में 50% दावे निपटाकर छाया EPFO, सर्विस में आई रफ्तार

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तीन दिन में 50% दावे निपटाकर छाया EPFO, सर्विस में आई रफ्तार
ऑटोमेशन से ईपीएफओ की सर्विस में आएगी तेजी

EPFO: ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) ने महज तीन दिनों में 50% दावे निपटाने का दावा किया है. वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत से अब तक मात्र तीन दिनों के भीतर करीब 68.96 लाख दावों का निपटान कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. यह आंकड़ा 1 अप्रैल से 5 जून 2025 तक का है. ईपीएफओ के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह कुल दावों का लगभग 50% है.

2024-25 में निपटाए गए सिर्फ 39% दावे

पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान तीन दिनों में निपटाए गए दावों का अनुपात मात्र 39% था, जो कि लगभग 2.34 करोड़ दावों के बराबर था. इस साल की तुलना में यह काफी कम है, जिससे साफ है कि ईपीएफओ के कामकाज में तेजी आई है.

ऑटोमैटिक दावे की सीमा बढ़ाकर होगी प्रक्रिया तेज

अधिकारी के अनुसार, ईपीएफओ अब स्वचालित दावा निपटान की सीमा को मौजूदा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने जा रहा है. इसके लिए किसी अतिरिक्त मंजूरी की आवश्यकता नहीं है. केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त इस बदलाव को मंजूरी दे सकते हैं.

तेजी से होगा बीमारी, शिक्षा और विवाह से जुड़े दावों का निपटान

वर्तमान में, 1 लाख रुपये तक के दावे जैसे कि बीमारी, शिक्षा, आवास और विवाह से जुड़े मामलों में पात्रता की स्थिति में स्वचालित रूप से तीन दिन में निपटान किया जाता है. 5 लाख रुपये तक की सीमा लागू होने से और अधिक मामलों में लाभ मिल सकेगा.

72 घंटे में सभी दावे निपटाने का लक्ष्य

ईपीएफओ का अंतिम लक्ष्य यह है कि पेंशन, बीमा और ईपीएफ निकासी जैसे सभी दावों को 72 घंटों के भीतर निपटाया जा सके. इसके लिए तकनीकी अपग्रेडेशन और प्रोसेस ऑप्टिमाइजेशन पर कार्य किया जा रहा है.

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7 करोड़ से अधिक सदस्यों को मिलेगा लाभ

वर्तमान में ईपीएफओ के 7 करोड़ से अधिक सक्रिय योगदानकर्ता सदस्य हैं. नए सुधारों के बाद इन सभी सदस्यों को तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद सेवा का अनुभव मिलेगा, जिससे ईपीएफओ की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता दोनों में इजाफा होगा.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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