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Home Business डेबिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले सावधान! इन 7 गलतियों से खाली हो सकता है बैंक अकाउंट, रहें सतर्क

डेबिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले सावधान! इन 7 गलतियों से खाली हो सकता है बैंक अकाउंट, रहें सतर्क

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डेबिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले सावधान! इन 7 गलतियों से खाली हो सकता है बैंक अकाउंट, रहें सतर्क
डेबिट कार्ड के गलत इस्तेमाल से बड़ा नुकसान होने की आशंका अधिक.

Debit Card Rules: आज की तारीख में डेबिट कार्ड हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं. रसोईघर के सामानों की खरीदारी से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बिल भुगतान तक करीब-करीब हर जगह डेबिट कार्ड का इस्तेमाल हो रहा है. इसके जरिए एटीएम से नकदी की निकासी तो आम है ही. यह न केवल लेनदेन को आसान बनाता है, बल्कि जेब में नकदी रखने के झंझट से भी बचाता है. लेकिन अगर डेबिट कार्ड का इस्तेमाल सावधानी और समझदारी से न किया जाए, तो यही सुविधा आपके बैंक खाते को खाली भी करा सकती है. इसका इस्तेमाल करने वाले लोग उन गलतियों के बारे में नहीं जानते, जिसे वे अनजाने में कर देते हैं. ऐसी करीब 7 तरह की गलतियां हैं. आइए, जानते हैं कि वे 7 कौन-कौन सी गलतियां हैं, जिससे दूर रहना चाहिए.

1. कार्ड सुरक्षा की अनदेखी करना

डेबिट कार्ड यूजर्स की सबसे बड़ी गलती कार्ड की सुरक्षा को हल्के में लेने वाली होती है. कई लोग पिन लिखकर रखते हैं, कार्ड दूसरों को दे देते हैं या एटीएम पर लापरवाही बरतते हैं, जो सीधे धोखाधड़ी को न्योता देना है.

  • अपना पिन कभी किसी को न बताएं और न कहीं लिखें.
  • एटीएम पर पिन डालते समय कीपैड को हाथ से जरूर ढकें.
  • अगर कार्ड गुम हो जाए या चोरी हो जाए, तो तुरंत बैंक को सूचना देकर कार्ड ब्लॉक कराएं.

2. बैंक स्टेटमेंट और सूचनाओं को नजरअंदाज करना

अक्सर लोग बैंक से आने वाले मैसेज, ईमेल या स्टेटमेंट को बिना देखे डिलीट कर देते हैं. यह आदत भारी पड़ सकती है. नियमित रूप से अपने ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और बैंक स्टेटमेंट की जांच करने से आपको किसी भी अनधिकृत लेनदेन का तुरंत पता चल सकता है. बेहतर होगा कि आप हर ट्रांजैक्शन के लिए एसएमएस और ईमेल अलर्ट चालू रखें, ताकि खाते में होने वाली हर गतिविधि पर आपकी नजर बनी रहे.

3. फ्री वाई-फाई पर लेनदेन करना

मॉल, रेलवे स्टेशन या कैफे का फ्री वाई-फाई जितना सुविधाजनक लगता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है. फ्री वाले नेटवर्क साइबर अपराधियों के लिए आसान शिकार होते हैं. ऐसे नेटवर्क पर ऑनलाइन बैंकिंग या कार्ड से भुगतान करने पर आपकी निजी जानकारी चोरी हो सकती है. हमेशा कोशिश करें कि लेनदेन केवल पर्सनल मोबाइल डेटा या सुरक्षित नेटवर्क पर ही करें.

4. ट्रांजैक्शन अलर्ट को गंभीरता से न लेना

आज लगभग सभी बैंक हर लेनदेन पर तुरंत नोटिफिकेशन भेजते हैं. ये अलर्ट आपके खाते की सुरक्षा की पहली लाइन होते हैं. अगर आप इन्हें नजरअंदाज करते हैं, तो संभव है कि धोखाधड़ी वाला ट्रांजैक्शन समय रहते पकड़ में ही न आए. हर अलर्ट को ध्यान से पढ़ें और कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें.

5. फिशिंग घोटालों का शिकार हो जाना

आजकल “आपका अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा”, “केवाईसी अपडेट करें”, “लिंक पर क्लिक करें” जैसे मैसेज आजकल आम हो गए हैं. इन्हीं के जरिए साइबर ठग आपकी कार्ड डिटेल्स चुराते हैं. गौर करने वाली बात यह है कि बैंक कभी भी फोन, एसएमएस या ईमेल पर पिन या ओटीपी नहीं मांगता. अनजान लिंक पर क्लिक न करें. किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज की पुष्टि सीधे बैंक से करें. आपकी एक छोटी-सी लापरवाही आपका पूरा बैंक बैलेंस साफ कर सकती है.

6. नियमित रूप से बैलेंस चेक न करना

अगर आप यह नहीं जानते कि खाते में कितना पैसा है, तो ओवरस्पेंडिंग और अनचाहे चार्ज लगना तय है. नियमित रूप से बैलेंस चेक करने से आप अपने खर्चों पर नियंत्रण रख सकते हैं और किसी भी गलत ट्रांजैक्शन को जल्दी पकड़ सकते हैं. कम से कम हफ्ते में एक बार मोबाइल बैंकिंग ऐप के जरिए बैलेंस जरूर देखें.

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7. नए कार्ड जानकारी अपडेट न करना

नया डेबिट कार्ड मिलने के बाद कई लोग ओटीटी ऐप्स, ई-कॉमर्स साइट्स और ऑटो-डेबिट सेवाओं पर पुरानी डिटेल्स अपडेट करना भूल जाते हैं. इससे पेमेंट फेल हो सकता है और जरूरी सेवाएं रुक सकती हैं. इसलिए, जैसे ही नया कार्ड मिले, तुरंत सभी प्लेटफॉर्म पर अपनी कार्ड जानकारी अपडेट करें.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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