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Home Business डॉलर की बढ़ती मांग के चलते रुपया पस्त, आम आदमी पर बढ़ेगा बोझ

डॉलर की बढ़ती मांग के चलते रुपया पस्त, आम आदमी पर बढ़ेगा बोझ

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डॉलर की बढ़ती मांग के चलते रुपया पस्त, आम आदमी पर बढ़ेगा बोझ
कच्चे तेल की कीमतों का रुपये पर प्रभाव

Crude Oil Price Impact on Rupee: सोमवार का दिन भारतीय इकॉनमी के लिए थोड़ी चिंता लेकर आया है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time low) पर जा गिरा है. बाजार खुलते ही रुपया 92.20 के स्तर पर था, जो देखते ही देखते 92.52 तक पहुंच गया है.

क्यों टूट रहा है रुपया?

रुपये की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आया उछाल है. सोमवार को कच्चे तेल के दाम करीब 25% बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है, जिसके लिए उसे डॉलर में पेमेंट करना पड़ता है. तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ गई है, जिससे रुपया कमजोर हो रहा है.

क्या बढ़ जाएगी महंगाई?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब रुपया गिरता है, तो विदेशों से सामान मंगाना महंगा हो जाता है. चूंकि भारत कच्चे तेल का बड़ा इम्पोर्टर है, इसलिए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं. अगर ट्रांसपोर्टेशन महंगा हुआ, तो फल, सब्जी और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों को डरा दिया है, जिससे वे सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर की ओर भाग रहे हैं.

आरबीआई (RBI) क्या कदम उठाएगा?

अब सबकी नजरें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पर टिकी हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर रुपये में गिरावट इसी तरह जारी रही, तो आरबीआई दखल दे सकता है. आरबीआई अपने डॉलर भंडार का इस्तेमाल करके बाजार में उतार-चढ़ाव को कम करने की कोशिश करेगा. फिलहाल बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक ग्लोबल हालात और सप्लाई चेन ठीक नहीं होती, तब तक रुपये पर यह दबाव बना रह सकता है.

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