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Home Business थार खरीदी, मॉडिफिकेशन कराया और फंस गए! एक्सीडेंट के बाद 4 लाख का बीमा क्लेम रिजेक्ट

थार खरीदी, मॉडिफिकेशन कराया और फंस गए! एक्सीडेंट के बाद 4 लाख का बीमा क्लेम रिजेक्ट

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थार खरीदी, मॉडिफिकेशन कराया और फंस गए! एक्सीडेंट के बाद 4 लाख का बीमा क्लेम रिजेक्ट

Car Insurance Claim : मान लीजिए आपके पास ₹17 लाख की चमचमाती महिंद्रा थार (Mahindra Thar) है और आप हर साल ₹42 हजार का भारी-भरकम इंश्योरेंस प्रीमियम भी भरते हैं. एक दिन खुदा न खास्ता गाड़ी का एक्सीडेंट हो जाता है. बीमा कंपनी का सर्वेक्षक आता है, फोटो लेता है और चला जाता है.

लेकिन 7 दिन बाद आपको खबर मिलती है कि आपका क्लेम रिजेक्ट हो गया है और गाड़ी में हुआ ₹3.8 लाख का नुकसान अब आपको अपनी जेब से भरना पड़ेगा. सुनकर झटका लगा न? आपको लग सकता है कि बीमा कंपनी ने कोई धोखाधड़ी की है और अब मामला उपभोक्ता फोरम जाएगा. लेकिन असल में यह कंपनी की धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि कार मालिक की एक छोटी सी लापरवाही का मामला है.

क्या है पूरा मामला?

यह हैरान करने वाला मामला पंजाब से सामने आया है. वहां के रहने वाले हरप्रीत सिंह ने अपनी महिंद्रा थार में कुछ कॉस्मेटिक और तकनीकी बदलाव (मॉडिफिकेशन) करवाए थे. उन्होंने

  • कंपनी से लगी हेडलाइट्स को काले रंग से पेंट करवा दिया.
  • गाड़ी में नई एलईडी (LED DRL) लाइट्स लगवाईं.
  • गाड़ी के बोनट (हुड) पर एक स्नोर्कल (Snorkel) लगवाया.
  • कार की बॉडी पर ‘मैट ऑलिव’ कलर की एक फैंसी फिल्म (रैपिंग) चढ़वाई.

जब गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ और हरप्रीत ने क्लेम मांगा, तो बीमा कंपनी ने उनके दावे को खारिज कर दिया. कंपनी का तर्क सीधा और साफ था—”एक्सीडेंट के बाद जो गाड़ी हमारे सामने है, उसका हुलिया और विवरण बीमा पॉलिसी में दर्ज गाड़ी के विवरण से मेल नहीं खाता है. गाड़ी में इतने बड़े बदलाव करने से पहले हमें इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी.”

क्या कहता है बीमा कानून ?

इंश्योरेंस एक्ट (बीमा अधिनियम) की धारा 64VB इस मामले में बेहद सख्त है. इसके मुताबिक, अगर कोई ग्राहक अपनी गाड़ी में कंपनी (फैक्ट्री फिटेड) की तरफ से दिए गए फीचर्स से अलग कोई भी महत्वपूर्ण बदलाव करता है और उसकी जानकारी बीमा कंपनी को नहीं देता है, तो उसकी पॉलिसी को अमान्य (Void) माना जा सकता है. ऐसे मामलों में अगर आप कोर्ट या कंज्यूमर फोरम भी जाते हैं, तो कानूनन आपकी अपील खारिज हो जाएगी क्योंकि आपने नियमों का उल्लंघन किया है.

मॉडिफिकेशन करवाना गुनाह नहीं, पर सूचना देना है जरूरी

भारत में ज्यादातर वाहन मालिकों को इस बात का अंदाजा ही नहीं है कि गाड़ी में अलग से बड़े चक्के (एलॉय व्हील्स) लगवाना, साइलेंसर बदलना या गाड़ी का रंग बदलना बीमा क्लेम को रोक सकता है.

अगर आप अपनी गाड़ी को मॉडिफाई करवाना चाहते हैं, तो इन बातों का हमेशा ध्यान रखें.

जरूरी कदमइसका क्या फायदा होगा?
RTO से मंजूरी लेंरंग बदलने या बड़े बदलावों के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से अनुमति जरूरी है.
बीमा कंपनी को बताएंबदलाव करने के तुरंत बाद अपनी इंश्योरेंस कंपनी को लिखित में सूचित करें.
नया प्रीमियम तय कराएंकंपनी इन बदलावों को अपने सिस्टम में दर्ज करेगी और इसके हिसाब से थोड़ा अतिरिक्त प्रीमियम लेकर आपके क्लेम को सुरक्षित कर देगी.

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अभिषेक पाण्डेय पिछले 4 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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