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Home Business Budget Suggestions: कैपेक्स 10%-15% बढ़ने की संभावना, प्राइवेट सेक्टर फिर भी सतर्क

Budget Suggestions: कैपेक्स 10%-15% बढ़ने की संभावना, प्राइवेट सेक्टर फिर भी सतर्क

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Budget Suggestions: कैपेक्स 10%-15% बढ़ने की संभावना, प्राइवेट सेक्टर फिर भी सतर्क
एक फरवरी को संसद में बजट पेश होगा.

Budget Suggestions: निजी क्षेत्र के अब भी सतर्क बने रहने के बीच सरकार आगामी आम बजट में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) पर अपना जोर बनाए रख सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा 11.21 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय में 10% से 15% तक बढ़ोतरी संभव है. वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाएगा और इससे इन्फ्रास्ट्रक्चर, निर्माण तथा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई गति मिलने की उम्मीद की जा रही है.

सरकारी पूंजीगत व्यय को बीते कुछ वर्षों से आर्थिक वृद्धि का सबसे मजबूत स्तंभ माना जा रहा है. जब निजी निवेश कमजोर या असमान रहता है, तब सरकार का इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च मांग को सहारा देता है और रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभाता है.

कैपेक्स बढ़ाने की गुंजाइश अब भी मौजूद

पीडब्ल्यूसी के भागीदार और आर्थिक सलाहकार सेवा प्रमुख रानेन बनर्जी का मानना है कि आगामी बजट में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाने के लिए पर्याप्त गुंजाइश है और सरकार को इस मौके का इस्तेमाल करना चाहिए. उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था में पूंजीगत व्यय को खपाने की एक सीमा होती है. इसे रातों-रात 30% तक बढ़ा देना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि इसके लिए निर्माण कंपनियों की क्षमता, भारी मशीनरी और कुशल संसाधनों की उपलब्धता जरूरी होती है.” उन्होंने कहा कि बहुत तेज बढ़ोतरी से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाएं आ सकती हैं. इसलिए 10% के आसपास की वृद्धि ज्यादा व्यावहारिक और टिकाऊ होगी.

12 लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है आवंटन

रानेन बनर्जी ने उम्मीद जताई कि सरकार अगले वित्त वर्ष में पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर करीब 12 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक ले जा सकती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में 11.21 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का प्रस्ताव रखा था, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार इस आधार को और मजबूत करती है, तो इसका सीधा असर सड़कों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा, शहरी विकास और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी परियोजनाओं पर पड़ेगा.

हर सेक्टर में एक जैसी नहीं है तस्वीर

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार, निजी पूंजीगत व्यय की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह असमान बना हुआ है. सभी क्षेत्रों में सुस्ती नहीं है, लेकिन व्यापक स्तर पर निजी निवेश अब भी पूरी तरह रफ्तार नहीं पकड़ पाया है. उनका कहना है कि सीमेंट और इस्पात जैसे पारंपरिक सेक्टर विस्तार में निवेश कर रहे हैं. इसकी बड़ी वजह यह है कि सरकार के बढ़े हुए पूंजीगत व्यय ने इन क्षेत्रों में मांग पैदा की है, जिससे निजी कंपनियों को नई क्षमता जोड़ने का भरोसा मिला है.

नए सेक्टरों में दिख रही है मजबूती

अदिति नायर के मुताबिक, कुछ नए और उभरते क्षेत्रों में निवेश को लेकर माहौल कहीं ज्यादा सकारात्मक है. डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निजी पूंजीगत व्यय में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. हालांकि, इसके उलट निर्यात उन्मुख उद्योगों और आयात से कड़ी प्रतिस्पर्धा झेल रहे क्षेत्रों की स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. वैश्विक अनिश्चितताओं और मांग में उतार-चढ़ाव का असर इन पर साफ दिख रहा है.

2026-27 में सरकारी खर्च से मिलेगी रफ्तार

अदिति नायर का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 में उच्च सरकारी पूंजीगत व्यय की दिशा में गति और तेज होगी. जब तक निजी निवेश पूरी तरह मजबूत नहीं होता, तब तक सरकार का कैपेक्स खर्च आर्थिक गतिविधियों को सपोर्ट करने में निर्णायक भूमिका निभाता रहेगा. विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी बजट में यदि सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव लगाती है, तो इससे रोजगार, औद्योगिक उत्पादन और ग्रामीण-शहरी कनेक्टिविटी तीनों को बल मिलेगा.

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बजट में क्या रहेगा अहम

आने वाले बजट में बाजार और उद्योग जगत की नजर इस बात पर टिकी होगी कि सरकार किन सेक्टरों को प्राथमिकता देती है और पूंजीगत व्यय को कैसे संरचित करती है. साफ है कि जब तक निजी क्षेत्र पूरी तरह निवेश मोड में नहीं आता, तब तक भारत की ग्रोथ स्टोरी का इंजन सरकारी कैपेक्स ही बना रहेगा.

भाषा इनपुट के साथ

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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