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Home Business बुनियादी ढांचा क्षेत्र में अदाणी ग्रुप की बादशाहत बरकरार, मुनाफा छप्परफाड़

बुनियादी ढांचा क्षेत्र में अदाणी ग्रुप की बादशाहत बरकरार, मुनाफा छप्परफाड़

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बुनियादी ढांचा क्षेत्र में अदाणी ग्रुप की बादशाहत बरकरार, मुनाफा छप्परफाड़
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी

Adani Group: भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में अदाणी ग्रुप की बादशाहत बरकरार है. सबसे खास बात यह है कि दिसंबर, 2024 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही में इस ग्रुप को छप्परफाड़ मुनाफा हुआ है. अदाणी ग्रुप ने कहा कि उसके पास अपने ऋण दायित्वों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नकदी उपलब्ध है. वित्त वर्ष 2024-25 के पहले नौ महीनों में ग्रुप की वित्तीय स्थिति मजबूत रही, जिसमें 53,024 करोड़ रुपये का नकद शेष दर्ज किया गया.

कर-पूर्व मुनाफे में रिकॉर्ड वृद्धि

दिसंबर 2024 को समाप्त 12 महीनों में, अदाणी ग्रुप का कर-पूर्व लाभ (EBITDA) 86,789 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 10.1% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई. अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में EBITDA 17.2% बढ़कर 22,823 करोड़ रुपये हो गया.

एफएफओ और लिक्विडिटी फ्लो में लगातार सुधार

पिछले 12 महीनों में कर के बाद नकद प्रवाह (FFO) 58,908 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इससे अदाणी ग्रुप के निवेश और ऋण अदायगी की क्षमता मजबूत बनी रही.

अदाणी एंटरप्राइजेज के उभरते व्यवसायों की अहम भूमिका

अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) के तहत सौर और पवन ऊर्जा विनिर्माण, हवाई अड्डे और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में 45% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई. .ससे कंपनी की वित्तीय सेहत को मजबूती मिली.

सकल ऋण और शुद्ध ऋण की स्थिति

अदाणी ग्रुप का सकल ऋण 2.58 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि मार्च 2024 के अंत तक यह 2.41 लाख करोड़ रुपये था. नकद शेष समायोजित करने के बाद शुद्ध ऋण 2.05 लाख करोड़ रुपये रहा.

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बुनियादी ढांचा कारोबार से आया 85% लाभ

अदाणी ग्रुप का लगभग 85% लाभ उसके बुनियादी ढांचा कारोबार से आया. इसमें मुख्य रूप से उपयोगिताओं और परिवहन क्षेत्र शामिल हैं.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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