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Home Business आधार कार्ड बनेगा किंगमेकर! वोट करना अब होगा और भी आसान

आधार कार्ड बनेगा किंगमेकर! वोट करना अब होगा और भी आसान

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आधार कार्ड बनेगा किंगमेकर! वोट करना अब होगा और भी आसान
Aadhaar Card

Aadhaar Card: आधार कार्ड अब केवल देश के नागरिकों की पहचान संख्या बनकर नहीं रह जाएगा, बल्कि अब यह किंगमेकर की भूमिका भी निभाने जा रहा है. मतदाता पहचान प्रक्रिया को और अधिक आसान बनाने के लिए चुनाव आयोग ने बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया है कि आधार कार्ड को 11 पहले से मान्य दस्तावेजों के साथ 12वें पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया जाए.

12वां पहचान दस्तावेज बना आधार कार्ड

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में मतदाताओं की पहचान स्थापित करने के लिए आधार कार्ड को एक अतिरिक्त पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाए. मंगलवार को बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे पत्र में चुनाव आयोग ने बताया कि “अब पहले से मान्य 11 दस्तावेजों के अलावा आधार कार्ड को भी वोटर पहचान के लिए स्वीकार किया जाए…”

अपनी पहचान के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं वोटर

आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं के वितरण) अधिनियम की धारा 9 के अनुसार, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड को “पहचान प्रमाण” के रूप में स्वीकार किया जाए, न कि “नागरिकता प्रमाण” के रूप में. जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 की धारा 23(4) के मुताबिक, आधार कार्ड पहले से ही पहचान के लिए मान्य दस्तावेजों में शामिल है. यानी वोटर अपनी पहचान के लिए आधार कार्ड का इस्तेमाल आराम से कर सकते हैं.

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आधार को नहीं मानने पर होगी कार्रवाई

चुनाव आयोग ने यह भी चेतावनी दी है कि “अगर कोई अधिकारी इस निर्देश के बावजूद आधार कार्ड स्वीकार करने से मना करता है या नियमों का पालन नहीं करता है, तो इसे बहुत गंभीरता से लिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निर्देश दिया है कि बिहार में चुनावी सूची के विशेष संशोधन अभियान में आधार कार्ड को मतदाताओं के पहचान प्रमाण के रूप में जरूरी तौर पर शामिल किया जाए. कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि यह निर्देश 9 सितंबर तक लागू किया जाएगा.

रिपोर्ट: सौम्या शाहदेव

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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