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Home Business ”मेक इन इंडिया” व “स्किल डेवलेपमेंट” के लिए क्यों अहम है जर्मनी का सहयोग ?

”मेक इन इंडिया” व “स्किल डेवलेपमेंट” के लिए क्यों अहम है जर्मनी का सहयोग ?

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”मेक इन इंडिया” व “स्किल डेवलेपमेंट” के लिए क्यों अहम है जर्मनी का सहयोग ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिवसीय दौरे में जर्मनी, रूस, फ्रांस और स्पेन की यात्रा में है. नरेंद्र मोदी जर्मनी पहुंच चुके हैं. जर्मनी में चांसलर एंजेला मर्केल से मिलेंगे. द्विपक्षीय वार्ता में भारत और जर्मनी के बीच कई अहम मुद्दों पर वार्ता होने की संभावना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर एंजेला के बीच व्यापार एवं निवेश, डिफेंस एवं आतंकवाद रोधक, रिसर्च और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्किल डेवलपमेंट, शहरी आधारभूत ढांचा, रेलवे और नागरिक उड्डयन,स्वास्थ्य एवं वैकल्पिक चिकित्सा क्षेत्रों पर वार्ता होगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए "मेक इन इंडिया" का नारा दिया था.प्रधानमंत्री के इस दौरे में दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष के बीच मैन्यफैक्चरिंग को लेकर सहयोग के मुद्दे पर भी बात होगी. ज्ञात हो कि वैश्विक मंदी के दिनों में भी जर्मनी की अर्थव्यवस्था मजबूती से टिकी रही. जर्मनी की अर्थव्यवस्था में 21 प्रतिशत हिस्सेदारी मैन्यूफैक्चरिंग की है. जर्मनी के सफलता में बहुत बड़ा योगदान स्किल डेवलेपमेंट का भी है.एक खास उम्र के बाद विद्यार्थी ज्यादा वक्त अप्रेंटिसशिप में गुजारते हैं. स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनिंग पर ध्यान दी जाती है.
खासतौर से 15 से 16 साल की उम्र के आधे छात्र वोकेशनल ट्रेनिंग और आधे छात्र अप्रेंटिसशिप के दौरान स्किल सीखते हैं. देश में मैन्यफैक्चरिंग उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्किल्ड लोगों का पुल तैयार किया गया है. बहुराष्ट्रीय कंपनियां सिमेन, बोस्क और बीएमडब्लयू जैसी कंपनियों की गढ़ माने जाने वाले जर्मनी में एमएसएमई कंपनियां भी बड़े पैमाने पर है. जर्मनी की कंपनियां है, जो अपने शानदार प्रोडक्ट के लिए दुनियाभर में जानी जाती है.
मजबूत निर्यात के दम पर भारी संख्या में रोजगार पैदा करने वाला देश जर्मनी का रोजगार का आंकड़ा कई विशेषज्ञों को हैरान करने वाली है. मंदी के दिनों में जर्मनी यूरोप की अकेली अर्थव्यवस्था रही जहां सबसे कम नौकरियों की कटौती हुई. एक दशक के अंदर बेरोजगारी दर घटकर आधा रह गयी है. जर्मनी में बेरोजगारी दर घटकर 5.9 प्रतिशत रह गयी है. वैश्विक निर्यात में जर्मनी की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत है और यह 1.3 ट्रिलीयन डॉलर तक पहुंच चुका है. ध्यान देने वाली बात है कि 2015 में जर्मनी में दस लाख शरणार्थी पहुंचे थे. इसके बावजूद भी इसकी अर्थव्यवस्था अन्य यूरोपीय देशों के मुकाबले स्थिर रही.

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