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Green Revolution के बरसों बाद देश में किसानों के लिए ‘Evergreen Revolution” लाना चाहते हैं PM Modi

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Green Revolution के बरसों बाद देश में किसानों के लिए ‘Evergreen Revolution” लाना चाहते हैं PM Modi

नयी दिल्ली : कृषि उत्पादन और किसानों की आमदनी में इजाफा करने के लिए देश में बरसों पहले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में शुरू किये गये Green revolution (हरित क्रांति) के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नये सिरे से ‘सदाबहार क्रांति’ लाना चाहते हैं. हालांकि, केंद्र में सत्तासीन होने के समय से ही पीएम मोदी लगातार किसानों की आमदनी को बढ़ाने के उपायों की घोषणा करते आ रहे हैं और इसके लिए सरकार की ओर से अनेक योजनाएं भी शुरू की जा रही हैं. इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी यह चाहते हैं कि देश में Green revolution की तरह ही कोई एक ऐसी क्रांति हो, जो कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आमदनी में भी इजाफा कर सके. बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि क्षेत्र में सदाबहार क्रांति पर इसलिए भी जोर दे रहे हैं, ताकि कृषि क्षेत्र के समक्ष आने वाली चुनौतियों का सामना किया जा सके.

इस खबर को भी पढ़िये : किसानों की आय दोगुनी करने पर पीएम मोदी ने किया बड़ा खुलासा, आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर रखी जायेगी नींव

उन्होंने ‘खाद्य सुरक्षा’ के बाद अब ‘पोषण सुरक्षा’ की अवधारणा को अपनाये जाने जोर दिया. उन्होंने कहा कि इसके लिए वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप की जरूरत है. मोदी प्रधानमंत्री निवास पर एक कार्यक्रम में बोल रहे थे, जहां उन्होंने प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन पर दो खंडों की पुस्तक का विमोचन किया.

2019 के लोकसभा चुनाव के बाद की अपनायी जा रही रणनीति

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है, जिससे 2022 को जब देश अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा होगा, तो किसानों की आय दोगुनी हो जायेगी. उन्होंने कहा कि देश की आबादी बढ़ रही है, लेकिन जमीन नहीं बढ़ेगी. हमें यह देखना होगा कि उत्पादकता कैसे बढायी जाये. कैसे कम भूमि पर अधिक उत्पादन हासिल किया जाये.

हरित क्रांति-एक और दो नहीं, सदाबहार क्रांति का हो आगाज

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में चुनौती कायम है. हम हरित क्रांति एक और हरित क्रांति दो की बात करते हैं, लेकिन हमारा लक्ष्य सदाबहार क्रांति का होना चाहिए. कृषि उत्पादन स्वस्थ तरीके से बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि कुपोषण एक चुनौती है. ऐसे में दालों के पोषक तत्व में सुधार होना चाहिए. प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न अंचलों में आर्थिक संतुलन का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इसे दूर किया जाना चाहिए, क्योंकि देश में ज्यादा समय तक क्षेत्रीय असंतुलन का होना ठीक नहीं है.

क्षमताओं का खींचना होगा खाका

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के विभिन्न क्षेत्रों की क्षमताओं का खाका खींचने की जरूरत है. उन्होंने कृषि के परंपरागत तरीके और वैज्ञानिक तरीके के एकीकरण का सुझाव दिया. किसानों की आमदनी को 2022 तक दोगुना करने के सरकार के लक्ष्य पर मोदी ने कहा कि स्वामीनाथन ने हाल में उन्हें कुछ सुझाव दिये हैं, जिन पर वह काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इसके पीछे विचार कम लागत, अधिक उत्पादन’ का है.

‘हर बूंद, अधिक फसल’ के सिद्धांत पर हो काम

प्रधनमंत्री मोदी ने कृषि क्षेत्र में अधिक वैज्ञानिक अनुसंधानों की जरूरत पर बल देते हए ‘हर बूंद, अधिक फसल’ और प्रयोगशाला से भूमि जैसे नारों का जिक्र किया. सरकारी कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल बीमा में इसे पेश किये जाने के एक साल के भीतर सात गुना का इजाफा हुआ है. उन्होंने कहा कि यूरिया पर नीम की कोटिंग के बाद इसकी ‘चोरी’ रुकी है और उर्वकर की खपत भी इसके उत्पादन को प्रभावित किये बिना नीचे आयी है.

दक्ष खेती के लिए जल भी है जरूरत

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और नदियों को जोड़ने की योजनाओं का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि लागत दक्ष खेती के लिए पानी की जरूरत है. मोदी ने कहा कि देश में सीमान्त किसानों की संख्या 85 फीसदी है. ऐसे में कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी की जानकारी के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करने की जरूरत है.

भूखे के लिए भोजन भगवान है

उन्होंने महात्मा गांधी के शब्दों का उल्लेख किया. महात्मा गांधी ने कहा था कि भूखे के लिए भोजन भगवान है. मोदी ने इस बात पर क्षोभ जताया कि आज का युवा खिलाड़ियों, फिल्म कलाकारों, यहां तक राजनीतिज्ञों से प्रभावित होता है, लेकिन वह स्वामीनाथन जैसे वैज्ञानिकों से प्रभावित नहीं होता.

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