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वोडाफोन-आइडिया के विलय में नियामकीय चुनौतियां फंसा सकती हैं पेंच

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वोडाफोन-आइडिया के विलय में नियामकीय चुनौतियां फंसा सकती हैं पेंच

नयी दिल्ली/लंदन : देश के दूरसंचार क्षेत्र में जियो इंफोकॉम की चुनौतियों का सामना करने के लिए भले ही वोडाफोन ने भारतीय कंपनी आइडिया के साथ विलय की पुष्टि कर दी हो, लेकिन उसके इस नये आइडिया में भारत की नियामकीय चुनौतियां पेंच फंसा सकती है. हालांकि ब्रिटेन के वोडाफोन समूह ने सोमवार को उसकी भारतीय इकाई की आदित्य बिड़ला समूह की आइडिया सेल्युलर के साथ विलय को लेकर हो रही बातचीत कर दी है और उसके अनुसार, यह सौदा पूरी तरह शेयर पर आधारित होगा, लेकिन उनके इस रास्ते में दोनों कंपनियों के विलय नियामकीय मंजूरी मिलने में कठिनाइयां आ सकती हैं. बाजार के विशेषज्ञों की मानें, तो इन दोनों कंपनियों के सामने नियामकीय मंजूरी के साथ व्यावहारिक क्रियान्वयन में चुनौतियां सामने आ सकती हैं.

हालांकि, ब्रिटने की दूरसंचार कंपनी वोडाफोन का कहना है कि इन दोनों कंपनियों के विलय से भारत में एक सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी का सृजन होगा और इसके पास भारतीय मोबाइल बाजार की सबसे अधिक करीब 43 फीसदी बाजार हिस्सेदारी होगी. साथ ही, यह संयुक्त इकाई रिलायंस जियो से मिल रही चुनौतियों का भी डटकर मुकाबला कर सकेगी और मौजूदा बाजार की दिग्गज कंपनी को कड़ी टक्कर दे सकेगी.

विशेषज्ञों के अनुसार, विलय के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा नियामकीय मंजूरी और व्यवहारिक क्रियान्वयन चुनौतियों के रूप में सामने आयेगी. यदि यह सौदा हो जाता है, तो विलय के बाद बनी कंपनी मोबाइल दूरसंचार क्षेत्र में एयरटेल को पीछे छोड़ते हुए देश की सबसे बड़ी इकाई बन जायेगी. दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मोबाइल नेटवर्क परिचालक वोडाफोन समूह के भारतीय कारोबार का देश की तीसरी सबसे बड़ी सेल्युलर ऑपरेटर से विलय के बाद एक ऐसी कंपनी अस्तित्व में आयेगी, जिसके ग्राहकों की संख्या 39.5 करोड़ होगी. यह दुनिया यह सबसे बड़ी कंपनियों में से एक होगी.

पुष्टि के बावजूद सौदे में अब भी बना है असमंजस

ब्रिटेन की कंपनी ने बयान में कहा कि वोडाफोन यह पुष्टि करती है कि वह आदित्य बिड़ला समूह के साथ विलय के बारे में बातचीत कर रही है. वोडाफोन इंडिया और आइडिया के बीच पूरी तरह शेयरों पर आधारित विलय की बात है. इसमें वोडोफोन की इंडस टावर्स की 42 फीसदी हिस्सेदारी को अलग रखा गया है, जो भारती एयरटेल और आइडिया के साथ संयुक्त उद्यम है. बयान के मुताबिक, जो भी विलय होगा, उसमें वोडाफोन को आइडिया में नये शेयर जारी किए जायेंगे और इससे वोडाफोन इंडिया का विघटन होगा. कंपनी ने कहा कि यह निश्चित नहीं है कि इस सौदे पर सहमति बनेगी और न ही इस समय सौदे के समय के बारे में कुछ बताया ही जा सकता है.

कर संबंधी विवादों में पहले से ही फंसी हुई है वोडाफोन

भारत में 2007 में प्रवेश के साथ वोडाफोन देश की दूसरे नंबर की दूरसंचार कंपनी बन गयी है. हालांकि, उसे कर संबंधी उलझनों का भी सामना करना पड़ रहा है. हचिसन से भारत में उसके मोबाइल कारोबार के 2007 के अधिग्रहण के सौदे को लेकर कर विभाग की पिछली तारीख से दो अरब डॉलर से अधिक की मांग को लेकर सरकार के साथ वोडाफोन का विवाद चल रहा है. वोडाफोन ने पिछले साल आखिर अपने कारोबार का मूल्य अरबों पाउंड घटाया है. ब्रिटेन की कंपनी भारतीय इकाई में अब तक सात अरब डॉलर से अधिक का निवेश कर चुकी है.

जियो में मुकेश अंबानी ने अब तक 25 अरब डॉलर का कर दिया है निवेश

बैंक आफ अमेरिका मेरिल लिंच ने कहा कि विलय से बनने वाली संयुक्त इकाई के समक्ष व्यवहारिक क्रियान्वयन के मुद्दे होंगे. देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस जियो इंफोकॉम मार्च तक मुफ्त वॉयस कॉल और डाटा सुविधा दे रही है. अभी तक जियो के ग्राहकरें की संख्या 7.4 करोड़ हो चुकी है. वह अभी तक 25 अरब डॉलर का निवेश कर चुकी है और उसने 4.8 अरब डॉलर या 30,000 करोड़ रुपये का और निवेश करने की घोषणा की है.

तो क्या मलेशियाई कंपनी की हिस्सेदारी लौटायेगा आदित्य बिड़ला समूह

आइडिया में आदित्य बिड़ला समूह की 42.2 फीसदी हिस्सेदारी है. वहीं, मलेशिया के एक्जाइटा ग्रुप बीएचडी के पास उसकी 19.8 फीसदी हिस्सेदारी है. वोडाफोन इंडिया ब्रिटेन के वोडाफोन समूह की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई है. इस बीच, सीएलएसए की एक रिपोर्ट के अनुसार, वोडाफोन-आइडिया को मिलाकर बनने वाली नयी कंपनी के पास 2018-19 तक मोबाइल बाजार की 43 फीसदी हिस्सेदारी होगी और यह पहले नंबर पर होगी. दूसरे नंबर में भारती एयरटेल के पास 33 फीसदी और रिलायंस जियो की 13 फीसदी हिस्सेदारी रहेगी.

अभी देश में एयरटेल 26.34 करोड़ ग्राहकों के सबसे बडी दूरसंचार सेवा प्रदाता है. वहीं, वोडाफोन इंडिया 20.02 करोड़ ग्राहकों के साथ दूसरी और आइडिया सेल्युलर 18.77 करोड़ ग्राहकों के साथ तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है. इस बीच सवाल यह भी पैदा होता है कि क्या आदित्य बिड़ला समूह आइडिया का वोडाफोन इंडिया के साथ विलय होने के बाद मलेशियाई कंपनी की हिस्सेदारी को वापस करेगा या फिर उसके शेयरों को लेकर वोडाफोन के साथ सौदा किया जायेगा.

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