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Home Business अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी, निर्यात में गिरावट, खुदरा मुद्रास्फीति 2 साल के शीर्ष पर

अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी, निर्यात में गिरावट, खुदरा मुद्रास्फीति 2 साल के शीर्ष पर

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अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी, निर्यात में गिरावट, खुदरा मुद्रास्फीति 2 साल के शीर्ष पर

नयी दिल्ली : आज शुक्रवार को जारी आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का सबब बन सकती है. औद्योगिक उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले गिरावट दर्ज हुई है. उधर सरकारी बैंकों के नतीजे सामने आये है. पहली तिमाही में एसबीआई के मुनाफे में 78 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है. वहीं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 600 करोड़ का घाटा हुआ है. जुलाई महीने में देश की निर्यात में 6.8 प्रतिशत की गिरावट हुई है. हालांकि व्यापार घाटा जुलाई में घटकर 7.76 अरब डालर रहा है. एक साल पहले इसी माह में यह 13 अरब डालर था.सरकारी बैंकों के एनपीए में इजाफा हुआ है. वहीं ताजा आंकड़ें में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के खराब आंकड़े सामने आये है.

औद्योगिक उत्पादन में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि , पिछले साल इसी माह थी 4.2 प्रतिशत की वृद्धि
विनिर्माण क्षेत्र के अपेक्षा कृत फीके प्रदर्शन तथा पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में गिरावट से औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर जून में धीमी होकर 2.1 प्रतिशत रही. वर्ष 2015 के इसी महीने में इसमें 4.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी. हालांकि इस बार जून में औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि मई के मुकाबले अधिक है. मई में इसमें 1.1 प्रतिशत :अस्थायी आंकडे में 1.2 प्रतिशत: की वृद्धि हुई थी.चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून की अवधि में औद्योगिक उत्पादन एक साल पहले की तुलना में 0.6 प्रतिशत बढा। पिछले साल इसी अवधि में इसमें औद्योगिक उत्पादन में 3.3 प्रतिशत की बढोतरी हुई थी.
खुदरा मुद्रास्फीति दो साल के शीर्ष पर, 6.07 प्रतिशत हुई
खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में बढकर 6.07 प्रतिशत पर पहुंच गई है जो इसका दो साल का उच्चस्तर है. यह रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से कहीं उंची है. खाद्य वस्तुओं के दाम चढने से खुदरा मुद्रास्फीति बढी है.त्योहारी सीजन से पहले चीन, तेल-घी तथा मसालों की मांग बढी है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जून में 5.77 प्रतिशत पर थी. जुलाई, 2015 में यह 3.69 प्रतिशत थी. मुद्रास्फीति का यह आंकड़ा सितंबर, 2014 के बाद सबसे उंचा है. उस समय खुदरा मुद्रास्फीति 6.46 प्रतिशत थी. जुलाई में खाद्य मुद्रास्फीति बढकर 8.35 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो जून में 7.79 प्रतिशत थी. सरकार ने रिजर्व बैंक के साथ नई मौद्रिक नीति रुपरेखा करार के तहत अगले पांच साल के लिए मुद्रास्फीति का लक्ष्य चार प्रतिशत (दो प्रतिशत उपर या नीचे) रखा है.
सार्वजनिक बैंकों के खराब नतीजे
देश का सबसे बडे वाणिज्यिक बैंक एसबीआई का एकीकृत शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में 77.8 प्रतिशत घटकर 1,046 करोड रुपये रहा. फंसे कर्जों में करीब दो गुनी वृद्धि के कारण के कारण बैंक के लाभ पर असर हुआ है. पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का एकीकृत शुद्ध लाभ 4,714 करोड रुपये था.
सेंट्रल बैंक आफ इंडिया को 30 जून को समाप्त तिमाही में 599.8 करोड रुपये का शुद्ध घाटा हुआ. फंसे कर्ज के एवज में प्रावधान दो गुना होने से बैंक को घाटा हुआ.सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ने एक नियामकीय सूचना में कहा कि बैंक को इससे पूर्व वित्त वर्ष 2015-16 की इसी तिमाही में 203.6 करोड रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था.बैंक की कुल आय आलोच्य तिमाही में घटकर 6,662.6 करोड रुपये रही जो एक वर्ष पूर्व 2015-16 की इसी तिमाही में 7,098.99 करोड रुपये थी.फंसे कर्ज के एवज में प्रावधान दो गुना बढकर 1,543.65 करोड रुपये रहा जो एक वर्ष पूर्व इसी तिमाही में 580.75 करोड रुपये था.

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