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रिजर्व बैंक इस मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों पर यथास्थिति बनाए रख सकता है

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रिजर्व बैंक इस मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों पर यथास्थिति बनाए रख सकता है

नयी दिल्ली : महंगाई बढने के संकेतों और वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल के बढते दामों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक कल द्वैमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा में नीतिगत दरों पर यथास्थिति बनाए रख सकता है. कुछ विशेषज्ञों के अनुसार रिजर्व बैंक ब्याज दर में कटौती की दिशा में कोई अगला कदम बढाने से पहले मानसून की प्रगति का थाह लेना चाहेगा. मानसूनी वर्षा की शुरुआत में इस साल देर हो रही है पर मौसम विभाग और निजी एजेंसियों ने वर्षा सामान्य या उससे उपर रहने का अनुमान लगाया है.रिजर्व बैंक के गर्वनर रघुराम राजन ने पिछले साल जनवरी से लेकर अब तक नीतिगत ब्याज दरों में कुल मिला कर 1.5 प्रतिशत की ही कटौती की है. पर उनकी आलोचना इसी बात को लेकर हो रही है कि उन्होंने दरों में कमी शुरू करने से पहले जरुरत से ज्यादा समय तक मौद्रिक नीति को सख्त रखा.

राजन नीतिगत दरों में कटौती करने के साथ-साथ बैंकों को उसका पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुंचान के लिए भी जोर देते आ रहे हैं. इस बार द्वैमासिक समीक्षा के बाद होने वाले गवर्नर के परंपरागत संवाददाता सम्मेलन को भी गौर से देखा जाएगा. क्योंकि उसमें राजन के सेवा काल के विस्तार के बारे में संकेतों को भी खोजा जाएगा. उनका कार्यकाल सितंबर में पूरा हो रहा है. आईडीबीआई बैंक के प्रबंध निदेशक किशोर खराट ने कहा, ‘इस बार की नीतिगत समीक्षा में मुझे कुछ खास नहीं दिखाई दे रहा. ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा.’

यह हो सकती है रघुराम राजन की आखिरी समीक्षा

प्रस्तावित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) अगली नौ अगस्त को पडने वाली समीक्षा की अगली तारीख से पहले काम करना शुरू कर देती है तो कल की समीक्षा राजन द्वारा पेश की जाने वाली आखिरी समीक्षा हो सकती है यदि आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा था कि सितंबर से इस समिति के पास ब्याज दरों को तय करने का आधार होगा. छह सदस्यीय इस समिति में रिजर्व बैंक के गर्वनर के साथ सरकार द्वारा नामित तीन सदस्य होंगे. इसका काम पूर्वनिर्धारित लक्ष्य पर उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति को लाना होगा.

मानसून के अनुमान का असर पड़ेगा कटौती पर

एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी ने कहा, ‘आरबीआई इस बार यथा स्थिति बनाए रखेगा.’ उसने कहा कि मुद्रास्फीति के आंकडें उम्मीद के अनुसार ही हैं पर वे बहुत सुखद नहीं कहे जा सकते. उसने कहा कि, ‘केवल एक ही उत्साह जनक बात है, मानसून के अच्छे होने का अनुमान. आरबीआई उसकी प्रगति को देख कर ही कटौती का कोई निर्णय करेगा.’ अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति बढ कर 5.39 प्रतिशत पर पहुंच गयी. वित्तीय कंपनी नोमूरा की एक रपट में कहा गया है कि मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत से उपर बनी रहने से हमें लगता है कि वर्तमान नीतिगत दरें 2016 के अंत तक बनी रहेंगी.’

आरबीआई ने छह माह के अंतराल के बाद अप्रैल में नीतिगत ब्याज 0.25 प्रतिशत घटा कर 6.5 प्रतिशत कर दिया है. स्टैंडर्ड चार्टर्ड इंडिया के मुख्य कार्यकारी जरीन दारुवाला ने कहा कि मानसून में विलंब को देखते हुए उन्हें मंगलवार को नीतिगत दर में कमी किये जाने की संभावना नहीं दिखती. मॉर्गन स्टेनली की भी राय है कि आरबीआई मानसून शुरू होने का इंतजार करेगा और मुद्रास्फीति के वास्तविक रुझानों को देना चाहेगा.

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