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नयी व्यवस्था : अब निवेशकों को देना होगा डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स

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नयी व्यवस्था : अब निवेशकों को देना होगा डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स

लाभांश वितरण कर यानी डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स(डीडीटी) डिविडेंड पर लगना वाला टैक्स है जो कंपनी अपने शेयरधारकों को अपने मुनाफे में से देती है. पहले, कानून कहता था कि डीडीटी कंपनियों पर लगेगा और शेयरधारकों पर यह नहीं लगेगा. एक फरवरी को संसद में पेश किये गये बजट में वित्त मंत्री ने एलान किया कि डीडीटी शेयरधारकों या यूनिट होल्डर्स पर लगेगा. इसलिए शेयर और म्यूचुअल फंड्स से आने वाली डिविडेंड आय पर निवेशकों से टैक्स लिया जायेगा. अभी तक कंपनियों को 15 फीसदी की दर पर डीडीटी का भुगतान करना होता था, लेकिन सारे सरर्चाज और सेस को जोड़ देने से यह प्रभावी रूप से 20.56 फीसदी रहता था.

नये नियम से हुआ बदलाव

इस साल बजट में की गयी घोषणा के अनुसार, सभी तरह की डिविडेंड आय यानी शेयरों या म्यूचुअल फंड्स से होने वाली डिविडेंड इनकम पर निवेशकों से टैक्स वसूला जायेगा. 1997 में इसे पहली बार शुरू किया गया था. उस समय यह 7.5 फीसदी के फ्लैट रेट से लिया जाता था. लेकिन यह रेट समय के साथ बढ़ती गयी. इससे कंपनी पर दबाव बढ़ता गया. लोगों ने यह भी तर्क दिया कि इससे दोगुना टैक्स हो जाता है.

उनका कहना था कि भारतीय कंपनियों के लिए 25 फीसदी की दर से कॉरपोरेट टैक्स का भुगतान करने के बाद प्रभावी टैक्स रेट जिसमें डीडीटी शामिल है, 48.5 फीसदी हो जाता है. इस तरह डिविडेंड इनकम, जो पहले निवेशकों के पास टैक्स से मुक्त थी, अब उस पर पूरी तरह टैक्स लागू होगा. इसका मतलब हुआ कि व्यक्ति की करयोग्य आय बढ़ जायेगी. यानी बजट 2020-21 में कॉरपोरेट द्वारा भुगतान किये गये डिविडेंड पर डीडीटी को खत्म करके उसके भार को निवेशकों पर शिफ्ट करने का प्रस्ताव किया गया है.

पहले, एक टैक्सपेयर को डिविडेंड पर 10 फीसदी की दर से टैक्स का भुगतान उसी स्थिति में करना होता था, जब उसे डिविडेंड से होनेवाली आय 10 लाख रुपये से ज्यादा होती थी. इसके अलावा म्यूचुअल फंड्स से मिले डिविडेंड पर किसी टैक्स का भुगतान नहीं करना होता था. बजट में किये गये प्रस्ताव के मुताबिक, डिविडेंड प्राप्त करने वाला व्यक्ति उपयुक्त दरों पर इनकम टैक्स का भुगतान करने के लिए जवाबदेह होगा, चाहे उसे मिले डिविडेंड की राशि कितनी भी हो.

निवेशकों पर असर

नये नियम से जुड़े कुछ फायदे और नुकसान हैं. कंपनी की नजर से देखें, तो डीडीटी को हटाने से, डिस्ट्रीब्यूशन के लिए उपलब्ध प्रॉफिट बढ़ता है, जो कंपनियां अपने बिजनेस में वापस लगा सकती हैं. इसलिए सामान्य तौर पर इससे फर्म वैल्यू बढ़ती है. दूसरा, शेयरधारक के पास मौजूद डिविडेंड पर टैक्स लगाने से फॉरेन इक्विटी इनवेस्टर की स्थिति में डबल टैक्स अवॉयडेंस एग्रीमेंट लागू हो सकता है और ऐसे में टैक्स की दर उसकी शेयरहोल्डिंग और रेसिडेंशियल स्टेटस पर निर्भर होगी.

इससे उन करदाताओं को फायदा होगा जो 10 फीसदी टैक्स वाले स्लैब में आते हैं क्योंकि उनके पास कैश फ्लो बढ़ेगा जबकि जो करदाता 20 फीसदी टैक्स स्लैब में आते हैं, उन पर कोई असर नहीं होगा. लेकिन जो करदाता 30 फीसदी स्लैब में आते हैं, वे ज्यादा टैक्स का भुगतान करेंगे.

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