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Home Business सुप्रीम कोर्ट में टाटा को मिली बड़ी सफलता, एनसीएलटी के फैसले पर लगायी रोक

सुप्रीम कोर्ट में टाटा को मिली बड़ी सफलता, एनसीएलटी के फैसले पर लगायी रोक

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सुप्रीम कोर्ट में टाटा को मिली बड़ी सफलता, एनसीएलटी के फैसले पर लगायी रोक

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी पंजीयक की याचिका निरस्त करने के राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी. कंपनी पंजीयक ने टाटा-मिस्त्री मामले में एनसीएलएटी के आदेश में संशोधन के लिए निवेदन किया था. मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड की अपील पर सुनवाई करने को सहमत हो गयी. पीठ ने संबंधित पक्षों को मामले में नोटिस भी जारी किया.

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ टाटा संस द्वारा दायर मुख्य याचिका के साथ ही इस मामले की सुनवाई करेगी. मामले में इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने साइरस मिस्त्री को दोबारा टाटा समूह का कार्यकारी चेयरमैन बनाने के एनसीएलएटी के आदेश पर 10 जनवरी को रोक लगा दी थी.

एनसीएलएटी ने 18 दिसंबर के फैसले में साइरस इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड और मिस्त्री को बड़ी राहत देते हुए मिस्त्री को दोबारा टाटा समूह का कार्यकारी चेयरमैन के पद पर बहाल करने का आदेश दिया था. एनसीएलएटी ने मिस्त्री को समूह के चेयरमैन पद से हटाने के 2016 के समूह के कदम को गलत बताया.

हालांकि, टाटा संस ने एनसीएलएटी के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. एनसीएलएटी ने कंपनी पंजीयक द्वारा टाटा संस को सार्वजनिक कंपनी से प्राइवेट कंपनी में बदलने को भी अवैध करार दिया था. इसके बाद कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के तहत आने वाले रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) ने एनसीएलएटी से टाटा संस को निजी क्षेत्र की कंपनी बनाने संबंधी फैसले में ‘अवैध’ और ‘आरओसी की मदद से’ जैसे शब्दों को हटाते हुए सुधार करने का आग्रह किया.

हालांकि, एनसीएलएटी ने आरओसी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उसके फैसले से आरओसी के ऊपर कोई लांछन नहीं लगाया गया है, यह फैसले को गलत समझना है. इसमें आरओसी के खिलाफ कोई बात नहीं कही गयी है. बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को एनसीएलएटी के उस आदेश को स्थगित कर दिया, जिसमें मिस्त्री को फिर से टाटा संस का कार्यकारी चेयरमैन बहाल करने का आदेश दिया गया था.

शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायाधिकरण के आदेश में खामियां हैं. अदालत ने कहा कि याचिका में मिस्त्री को फिर से चेयरमैन बनाने के बारे में कोई निवेदन नहीं किया गया था, लेकिन न्यायाधिकरण ने आगे बढ़ते हुए इसके लिए आदेश दे दिया.

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