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Home Business Unitech का प्रबंधन नियंत्रण अपने हाथ ले सकती है केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट में प्रस्ताव पर पुनर्विचार की भरी हामी

Unitech का प्रबंधन नियंत्रण अपने हाथ ले सकती है केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट में प्रस्ताव पर पुनर्विचार की भरी हामी

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Unitech का प्रबंधन नियंत्रण अपने हाथ ले सकती है केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट में प्रस्ताव पर पुनर्विचार की भरी हामी

नयी दिल्ली : एक अहम घटनाक्रम के तहत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह कर्ज में फंसी कंपनी यूनिटेक लिमिटेड का प्रबंधन अपने हाथ में लेने, कंपनी की अटकी परियोजनाओं को पूरा करने और उसके 12 हजार परेशान घर खरीदारों को राहत पहुंचाने के अपने 2017 के प्रस्ताव पर पुनर्विचार को तैयार है. केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली एक पीठ को छह पन्नों के नोट में बताया है कि वह यूनिटेक लिमिटेड के प्रबंधन को हटाकर सरकार द्वारा नामित 10 निदेशक नियुक्त करने के दिसंबर, 2017 के अपने प्रस्ताव पर फिर से विचार करने को तैयार है.

सुप्रीम कोर्ट ने 18 दिसंबर, 2019 को केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या वह 2017 के अपने प्रस्ताव पर विचार करने के लिए तैयार है, क्योंकि यूनिटेक लिमिटेड की परियोजनाओं को किसी विशिष्ट एजेंसी द्वारा अपने हाथों में लेने की तत्काल जरूरत है, ताकि घर खरीदारों के हित में अटकी परियोजनाओं को तय समय के भीतर पूरा किया जा सके. केंद्र सरकार ने नये नोट में पुराने प्रस्ताव पर विचार करने की सहमति व्यक्त करने के साथ ही कहा कि वह कंपनी की अटकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिये इसमें पैसे नहीं लगायेगी.

सरकार ने अदालत से यह भी कहा कि निश्चिंतता की अवधि सुनिश्चित करते हुए उसे 12 महीने की स्थगन अवधि का निर्देश देना चाहिए. सरकार ने यूनिटेक के लिए प्रस्तावित निदेशक मंडल के लिए हरियाणा कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी युद्धवीर सिंह मलिक को चेयरमैन और प्रबंध निदेशक बनाने का सुझाव दिया था. सदस्यों के लिए सरकार ने एनबीसीसी के पूर्व सीएमडी एके मित्तल, एचडीएफसी क्रेडिला फाइनेंस सर्विस प्राइवेट लिमिटेड की चेयरमैन रेणू सूद कर्णाड, एंबैसी ग्रुप के सीएमडी जीतू वीरवानी और हीरानंदानी ग्रुप के एमडी निरंजन हीरानंदानी का नाम सुझाया है.

सरकार ने यह भी कहा कि प्रस्तावित निदेशक मंडल द्वारा तैयार समाधान रूपरेखा के निरीक्षण के लिए अदालत एक सेवानिवृत्त न्यायधीश की भी नियुक्ति कर सकता है. केंद्र सरकार ने कहा कि न्यायालय प्रस्तावित निदेशक मंडल को महत्वपूर्ण प्रबंधकों तथा न्यायिक, दिवाला शोधन, वित्तीय परामर्शदाताओं, रियल एस्टेट पेशेवरों आदि की नियुक्ति करने का अधिकार दे सकता है.

सरकार ने अदालत से प्रवर्तकों, कंपनी के मौजूदा प्रबंधन, फोरेंसिक ऑडिटर्स, संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों, बैंकों, वित्तीय संस्थानों और राज्य सरकारों को प्रस्तावित निदेशक मंडल के साथ सहयोग करने का निर्देश देने का आग्रह किया. सरकार ने कंपनी, कंपनी के मौजूदा प्रबंधन तथा प्रवर्तकों के खिलाफ देश भर में चल रहे विभिन्न मुकदमों से प्रस्तावित निदेशक मंडल को मुक्त रखने की भी मांग की.

सरकार ने प्रस्तावित निदेशक मंडल को अटकी परियोजनाएं पूरा करने के लिए घर खरीदारों से बकाया राशि वसूल करने और नहीं बिक पायी संपत्तियों तथा जिम्मेदारियों से मुक्त संपत्तियों की बिक्री करने की मंजूरी देने का भी आग्रह किया. गौरतलब है कि यूनिटेक लिमिटेड के बारे में फोरेंसिक ऑडिटर द्वारा सौंपी गयी रिपोर्ट में कहा गया है कि 2006 से 2014 के दौरान 29,800 घर खरीदारों से करीब 14,270 करोड़ रुपये जुटाने और छह वित्तीय संस्थानों से करीब 1,805 करोड़ रुपये जुटाने का पता चला है.

कंपनी ने 74 परियोजनाओं को पूरा करने के लिए यह राशि जुटायी थी. इसमें पता चला है कि कंपनी ने घर खरीदारों से जुटाये करीब 5,063 करोड़ रुपये और वित्तीय संस्थानों से जुटाये करीब 763 करोड़ रुपये का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि 2007 से 2010 के दौरान कंपनी द्वारा कर चोरी के लिहाज से पनाहगाह माने जाने वाले देशा में बड़ा निवेश किये जाने का पता चलता है.

फारेंसिंक ऑडिट में यह सब पता चलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक लिमिटेड के प्रवर्तकों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया. यूनिटेक के प्रवर्तक संजय चंद्रा और उनके भाई अजय चंद्रा घर खरीदारों से प्राप्त धन की हेरा-फेरी के आरोप में फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं.

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